घरेलू हिंसा या किसी भी मुसीबत में फंसी महिलाओं के लिए मुफ़्त कानूनी, मेडिकल, मनोवैज्ञानिक और पुलिस सहायता एक ही छत के नीचे।
यहाँ सखी (One Stop Centre / 181) योजना के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी गई है:
पहले जब किसी महिला के साथ घरेलू हिंसा (Domestic Violence), दहेज उत्पीड़न या बलात्कार जैसी कोई घटना होती थी, तो उसे FIR के लिए पुलिस स्टेशन, इलाज के लिए अस्पताल और केस लड़ने के लिए वकील के पास अलग-अलग भटकना पड़ता था। इस प्रक्रिया में पीड़ित महिला और ज़्यादा मानसिक तनाव से गुज़रती थी।
इसी समस्या को दूर करने के लिए भारत सरकार ने देश के लगभग हर ज़िले (District) में 'सखी वन स्टॉप सेंटर' खोले हैं। अब पीड़ित महिला को अलग-अलग जगह नहीं भटकना पड़ेगा, बल्कि पुलिस, डॉक्टर और वकील खुद उस सेंटर पर आकर महिला की मदद करेंगे।
सखी सेंटर मुख्य रूप से 5 प्रकार की सेवाएँ पूरी तरह से मुफ़्त प्रदान करता है, जो 24 घंटे (24x7) उपलब्ध रहती हैं:
| सेवा (Service) | विवरण (Details) |
|---|---|
| 1. मेडिकल सहायता (Medical Help) | ज़्यादातर सखी सेंटर ज़िला अस्पताल (District Hospital) के अंदर या उसके बिल्कुल पास बनाए गए हैं। चोट लगने या यौन शोषण के मामलों में तुरंत डॉक्टर को बुलाकर मुफ़्त इलाज और मेडिकल जांच (MLC) करवाई जाती है। |
| 2. पुलिस सहायता (Police Desk) | सेंटर में महिला पुलिस अधिकारी मौजूद होती हैं। महिला को थाने नहीं जाना पड़ता, बल्कि सखी सेंटर में ही उसकी शिकायत (FIR) या DIR (Domestic Incident Report) दर्ज़ की जाती है। |
| 3. कानूनी मदद (Legal Aid) | अगर महिला कोर्ट में केस लड़ना चाहती है, तो ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के माध्यम से उसे मुफ़्त में सरकारी वकील (Free Lawyer) उपलब्ध कराया जाता है। |
| 4. मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग | हिंसा के कारण मानसिक सदमे से गुज़र रही महिला को डिप्रेशन से बाहर निकालने के लिए प्रोफेशनल काउंसलर (Counselor) मुफ़्त में काउंसलिंग करते हैं। |
| 5. सुरक्षित आश्रय (Shelter) | अगर महिला को अपने घर जाने में डर लग रहा है (जान का खतरा है), तो वह सखी सेंटर में 5 दिनों तक मुफ़्त में रुक सकती है। यहाँ खाना, कपड़े और सुरक्षा मुफ़्त मिलती है। (अगर ज़्यादा दिन रुकना हो तो उसे 'नारी निकेतन' या 'स्वाधार गृह' शिफ्ट कर दिया जाता है)। |
अगर किसी महिला को तुरंत मदद की ज़रूरत है, तो वह इन 3 तरीकों से सखी सेंटर तक पहुँच सकती है:
प्र. क्या सखी सेंटर में जाने के लिए पुलिस में केस (FIR) करना अनिवार्य है?
उ. बिल्कुल नहीं! अगर कोई महिला सिर्फ डिप्रेशन में है या उसे पति/परिवार से सिर्फ बात करके (काउंसलिंग के ज़रिए) मामला सुलझाना है, तो वह बिना किसी पुलिस केस के भी वहाँ जा सकती है। FIR दर्ज़ करना या न करना पूरी तरह से महिला की इच्छा पर निर्भर करता है।
प्र. क्या मेरे परिवार को पता चल जाएगा कि मैं सखी सेंटर में हूँ?
उ. सखी सेंटर में महिला की जानकारी पूरी तरह से गुप्त (Confidential) रखी जाती है। जब तक महिला खुद न चाहे, उसके परिवार या किसी अन्य व्यक्ति को कोई जानकारी नहीं दी जाती है।
प्र. क्या सखी सेंटर में पुरुषों के लिए भी कोई सुविधा है?
उ. नहीं। 'वन स्टॉप सेंटर' योजना विशेष रूप से केवल महिलाओं और लड़कियों (तथा उनके साथ आए छोटे बच्चों) की सुरक्षा और मदद के लिए बनाई गई है।
घरेलू हिंसा या किसी भी प्रकार के शोषण को सहना कोई समाधान नहीं है। भारत सरकार की सखी (One Stop Centre) योजना महिलाओं के लिए एक बहुत बड़ा सुरक्षा कवच है।
अगर आपके आस-पास कोई महिला या बच्ची मुसीबत में है, तो उसे तुरंत 181 डायल करने की सलाह दें या उसे अपने ज़िले के सखी सेंटर लेकर जाएं। वहाँ मौजूद महिला पुलिस, डॉक्टर और काउंसलर उसकी हर संभव मदद करेंगे—वह भी बिना एक रुपया खर्च किए।
किसी भी आपात स्थिति या मुसीबत में फंसी महिला टोल-फ्री महिला हेल्पलाइन नंबर 181 डायल कर सकती है।
हर ज़िले में एक सखी (One Stop Centre) खोला गया है, जो आमतौर पर ज़िला अस्पताल (District Hospital) के पास होता है।
महिला सीधे सेंटर पर जा सकती है। वहाँ पुलिस डेस्क, वकील, डॉक्टर और काउंसलर 24 घंटे मौजूद रहते हैं।
अगर महिला को घर जाने में डर है, तो सेंटर में 5 दिनों तक सुरक्षित रुकने (Shelter) की मुफ़्त सुविधा भी होती है।
नहीं, महिला चाहे तो बिना पुलिस केस किए भी वहाँ काउंसलिंग (Counseling) या मेडिकल हेल्प ले सकती है।
बिना किसी रुकावट के सीधे सरकारी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें।
नोट: किसी भी सरकारी सेवा के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें।
JanSarkari.com आपको सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करता है। यदि आपको सखी (One Stop Centre / 181) से जुड़ी कोई समस्या है, तो आप संबंधित विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।