भारत के विश्वविद्यालयों में उच्च स्तरीय रिसर्च (R&D) और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए प्रोफेसरों और शोधकर्ताओं (Ph.D) को भारी आर्थिक अनुदान।
यहाँ PM Research Chair (PMRC) और फेलोशिप के बारे में अत्यंत विस्तृत और सम्पूर्ण जानकारी (3000+ शब्द) दी गई है:
भारत में टैलेंट की कोई कमी नहीं है, लेकिन रिसर्च के लिए पैसे (Funding) की हमेशा कमी रही है। इस योजना के 4 मुख्य लक्ष्य हैं:
हमारे देश के IITs और टॉप विश्वविद्यालयों के होनहार छात्र अपनी Ph.D करने के लिए विदेशों (USA, UK) में चले जाते हैं क्योंकि वहां रिसर्च लैब अच्छी होती हैं। PMRC का मकसद भारत में ही वर्ल्ड-क्लास लैब्स (World-class Labs) बनाकर उन छात्रों को देश में रोकना है।
हम आज भी कई नई तकनीकों (जैसे सेमीकंडक्टर, मेडिकल मशीनें) के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं। सरकार चाहती है कि PM Research Chair के माध्यम से भारतीय वैज्ञानिक नई तकनीक खोजें, भारत के नाम पर पेटेंट (Patents) कराएं और देश को आत्मनिर्भर बनाएं।
टेक्नोलॉजी के अलावा, UGC कई ऐसी चेयर भी स्थापित करता है जो स्वामी विवेकानंद, दीनदयाल उपाध्याय, या डॉ. बी.आर. अंबेडकर जैसे महापुरुषों के सामाजिक और आर्थिक विचारों (Socio-economic policies) पर रिसर्च करती हैं, ताकि उन विचारों को आज के प्रशासन में लागू किया जा सके।
एक 'चेयर प्रोफेसर' अकेले काम नहीं करता। उसके अंडर में कई Junior Research Fellows (JRF) और Ph.D. स्कॉलर्स काम करते हैं। इस योजना के तहत इन छात्रों को ₹70,000 से लेकर ₹80,000 प्रति माह तक की फेलोशिप (जैसे PMRF में मिलती है) दी जाती है, ताकि वे बिना आर्थिक चिंता के अपनी रिसर्च पर फोकस कर सकें।
यह योजना देश की सबसे महंगी और प्रीमियम रिसर्च योजनाओं में से एक है। इसमें मिलने वाले फंड को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है:
| फंडिंग का प्रकार (Type) | अनुमानित राशि / लाभ (Amount) |
|---|---|
| 1. चेयर प्रोफेसर का वेतन (Salary) | संस्थान के नियमों के अनुसार (लगभग ₹1.5 लाख से ₹2.5 लाख प्रतिमाह) + अन्य भत्ते। |
| 2. कंटीजेंसी / रिसर्च ग्रांट (Research Grant) | लैब का सामान, कंप्यूटर, केमिकल और यात्राओं के लिए सालाना लाखों से करोड़ों रुपये (रिसर्च प्रपोज़ल के आधार पर)। |
| 3. सपोर्ट स्टाफ और स्कॉलर्स (Ph.D Students) | अंडर में काम करने वाले स्कॉलर्स को ₹70,000 - ₹80,000 प्रतिमाह फेलोशिप + ₹2 लाख सालाना रिसर्च ग्रांट (PMRF नियमों के तहत)। |
यह कोई सामान्य स्कॉलरशिप नहीं है जो हर किसी को मिल जाए। इसके लिए बहुत कड़े नियम होते हैं:
PMRC या UGC की चेयर के लिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन और बहुत पारदर्शी होती है:
आजकल सरकार का फोकस उन तकनीकों पर है जो भविष्य के लिए ज़रूरी हैं, जैसे:
अगर आप एक प्रोफेसर, साइंटिस्ट या एक होनहार विज्ञान के छात्र हैं, तो PM Research Chair (PMRC) और इसके जैसी फेलोशिप्स (PMRF) आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।
अब वो ज़माना गया जब भारत में रिसर्च के लिए फंड नहीं मिलता था। आज अगर आपके दिमाग में कोई ऐसा 'आइडिया (Idea)' है जो देश की कोई बड़ी समस्या सुलझा सकता है, तो भारत सरकार आपके पीछे करोड़ों रुपये लगाने को तैयार है। अपने ज्ञान (Knowledge) का इस्तेमाल विदेश जाकर डॉलर कमाने में नहीं, बल्कि अपने देश को 'विश्वगुरु' बनाने में करें!
शिक्षा मंत्रालय (MoE) या UGC की आधिकारिक वेबसाइट (ugc.gov.in) पर जाएं।
PMRC (PM Research Chair) या संबंधित फेलोशिप के लिए नवीनतम 'Call for Proposals' (नोटिफिकेशन) चेक करें।
पात्रता की शर्तें (जैसे Ph.D, पब्लिकेशन रिकॉर्ड, या संस्थान की NIRF रैंकिंग) पूरी होने पर ऑनलाइन आवेदन फॉर्म भरें।
अपने रिसर्च प्रपोज़ल (Research Proposal) को सबमिट करें। सेलेक्शन कमेटी द्वारा शॉर्टलिस्ट होने पर आपको फंड और 'चेयर' अलॉट की जाएगी।
यह भारत सरकार और UGC की एक प्रतिष्ठित योजना है, जिसके तहत देश के टॉप विश्वविद्यालयों (IIT, NIT, Central Universities) में विशेष 'रिसर्च चेयर (Research Chair)' स्थापित की जाती है, ताकि देश की बड़ी समस्याओं (जैसे हेल्थकेयर, एआई, कृषि) पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का शोध हो सके।
रिसर्च चेयर मुख्य रूप से एक 'अनुभवी प्रोफेसर या वैज्ञानिक' (Chair Professor) को दी जाती है। लेकिन उस चेयर के अंडर में काम करने वाले कई Ph.D. स्कॉलर्स और पोस्ट-डॉक छात्रों को भी भारी फेलोशिप (Stipend) मिलती है।
चयन बहुत ही सख्त होता है। उम्मीदवार के पिछले रिसर्च पेपर्स (Publications), पेटेंट्स (Patents), और रिसर्च प्रपोज़ल की गुणवत्ता को राष्ट्रीय स्तर की कमेटी (Selection Committee) द्वारा जांचा जाता है।
बिना किसी रुकावट के सीधे सरकारी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें।
नोट: किसी भी सरकारी सेवा के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें।
JanSarkari.com आपको सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करता है। यदि आपको PM Research Chair (PMRC) से जुड़ी कोई समस्या है, तो आप संबंधित विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।