"हर खेत को पानी" और "प्रति बूंद अधिक फसल"! अपने खेत में ड्रिप (Drip) और स्प्रिंकलर (Sprinkler) सिंचाई सिस्टम लगाने पर 55% से 90% तक की भारी सरकारी सब्सिडी।
यहाँ प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY - Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana) के बारे में अत्यंत विस्तृत और सम्पूर्ण जानकारी (3000+ शब्द) दी गई है:
सिंचाई कोई छोटा विषय नहीं है, इसलिए सरकार ने इस योजना को 4 अलग-अलग भागों में बांटा है:
पारंपरिक खेती में हम खेत के एक कोने में पाइप छोड़ देते हैं और पूरे खेत में पानी भर देते हैं (इसे Flood Irrigation कहते हैं)। इसमें 70% पानी भाप बनकर या ज़मीन के बहुत नीचे जाकर बर्बाद हो जाता है।
इसमें प्लास्टिक की पतली पाइपलाइन खेत में बिछाई जाती है। हर पौधे की जड़ के पास पाइप में एक छोटा सा छेद (Dripper) होता है। पानी सीधा पौधे की जड़ में बूंद-बूंद करके टपकता है।
फायदेमंद: फल (आम, पपीता), सब्ज़ियां (टमाटर, मिर्च), और गन्ने की खेती के लिए यह सबसे बेहतरीन तकनीक है।
इसमें खेत में लोहे या एल्युमीनियम के स्टैंड पर नोज़ल (Nozzle) लगा दिए जाते हैं, जो बारिश की तरह चारों तरफ पानी छिड़कते हैं।
फायदेमंद: गेहूं, चना, मटर, सरसों, और मूंगफली जैसी फसलों के लिए जहाँ पूरे खेत को पानी देना होता है। (यह रेतीली ज़मीन के लिए वरदान है)।
इस योजना में पैसा केंद्र और राज्य सरकार मिलकर देती हैं:
| किसान का प्रकार | केंद्र सरकार का हिस्सा | राज्य का टॉप-अप (Total Subsidy) |
|---|---|---|
| छोटे एवं सीमांत किसान (5 एकड़ से कम ज़मीन) | 55% | कई राज्य इसमें 25-35% अपनी तरफ से मिलाते हैं। यानी किसान को कुल 80% से 90% तक की सब्सिडी मिलती है। |
| अन्य / बड़े किसान (5 एकड़ से ज़्यादा) | 45% | इन्हें राज्य का शेयर मिलाकर कुल 70% से 80% तक की भारी छूट मिल जाती है। |
उदाहरण: अगर 1 हेक्टेयर (ढाई एकड़) खेत में ड्रिप सिस्टम लगाने का कुल खर्च 1,00,000 रुपये है, तो सरकार सीधे 80,000 से 90,000 रुपये (सब्सिडी) आपके वेंडर को दे देगी। आपको अपनी जेब से सिर्फ 10,000 से 20,000 रुपये (किसान का हिस्सा / Farmer Share) ही देने होंगे!
चूंकि खेती राज्य सरकार का विषय है, इसलिए इसका आवेदन हर राज्य की अपनी कृषि वेबसाइट पर होता है:
प्र. क्या खेत में पहले से ट्यूबवेल होना ज़रूरी है?
उ. हाँ, ड्रिप या स्प्रिंकलर सिस्टम चलाने के लिए खेत में पानी का स्रोत (Source of Water) जैसे कुआं, बोरवेल, या नहर होना बहुत ज़रूरी है। इसके बिना सब्सिडी पास नहीं होगी।
प्र. मैंने बाज़ार से खुद पाइप खरीदे हैं, क्या मुझे इसका बिल लगाने पर सब्सिडी मिलेगी?
उ. बिल्कुल नहीं! सरकार सिर्फ उन्हीं कंपनियों को सब्सिडी देती है जो PMKSY के तहत रजिस्टर्ड (Empanelled) हैं। आपको ऑनलाइन पोर्टल पर दिए गए वेंडर से ही कोटेशन (Quotation) लेकर सामान लगवाना होगा।
प्र. क्या सब्सिडी का पैसा मेरे (किसान के) बैंक खाते में आता है?
उ. नियमों के अनुसार, आपको सिर्फ अपनी हिस्सेदारी का पैसा (Farmer Share - 10% या 20%) वेंडर को देना होता है। बाकी की पूरी सब्सिडी का पैसा सरकार सीधे उस कंपनी (Vendor) के बैंक खाते में ट्रांसफर करती है, जिसने आपके खेत में सामान लगाया है। (कुछ राज्यों में यह पैसा किसान के खाते में आकर वेंडर को ट्रांसफर होता है)।
आज के समय में जब ज़मीन का पानी तेज़ी से नीचे जा रहा है, पीएम कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) खेती का भविष्य है। इज़राइल (Israel) जैसे देश जहाँ रेगिस्तान है, वे इसी ड्रिप सिंचाई तकनीक के दम पर दुनिया भर में फल और सब्ज़ियां एक्सपोर्ट कर रहे हैं।
अगर आप भी खेती से भारी मुनाफा कमाना चाहते हैं, पानी और खाद का खर्च बचाना चाहते हैं, तो बाढ़ वाले तरीके (Flood irrigation) को छोड़कर माइक्रो इरीगेशन अपनाएं। सरकार 80-90% पैसा दे रही है, यह मौका हाथ से न जाने दें। आज ही अपने नज़दीकी कृषि विभाग कार्यालय जाएं और ऑनलाइन आवेदन करें।
अपने राज्य के कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (जैसे UP पारदर्शी किसान, MahaDBT, RajKisan) पर जाएं।
'माइक्रो इरीगेशन (Micro Irrigation)' या 'PMKSY' योजना के तहत ड्रिप/स्प्रिंकलर लगाने के लिए ऑनलाइन आवेदन करें।
आवेदन के साथ अपना आधार कार्ड, बैंक पासबुक और ज़मीन की खतौनी (Land Records) की कॉपी अपलोड करें।
मंजूरी मिलने के बाद रजिस्टर्ड वेंडर आपके खेत में सिस्टम लगाएगा, और सब्सिडी का पैसा सीधे वेंडर या आपके खाते में आ जाएगा।
केंद्र सरकार छोटे और सीमांत किसानों (SC/ST/महिला) को 55% और अन्य किसानों को 45% सब्सिडी देती है। इसके अलावा, कई राज्य सरकारें (जैसे यूपी, गुजरात) अपनी तरफ से अतिरिक्त पैसा मिलाती हैं, जिससे कुल सब्सिडी 80% से 90% तक हो जाती है!
आपको सिर्फ अपना हिस्सा (यानी 10% से 20% पैसा) रजिस्टर्ड वेंडर या एजेंसी को देना होता है। बाकी का 80-90% पैसा सरकार सीधे उस कंपनी (Vendor) के खाते में भेजती है जो आपके खेत में पाइपलाइन और ड्रिप बिछाती है।
ड्रिप (टपक) सिंचाई में पाइप से पानी सीधे पौधे की जड़ में बूंद-बूंद करके गिरता है (यह सब्ज़ियों और बागवानी के लिए सबसे अच्छा है)। स्प्रिंकलर (फव्वारा) सिंचाई में पानी बारिश की तरह ऊपर से छिड़का जाता है (यह गेहूं, चना, सरसों आदि के लिए बेहतर है)।
बिना किसी रुकावट के सीधे सरकारी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें।
नोट: किसी भी सरकारी सेवा के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें।
JanSarkari.com आपको सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करता है। यदि आपको पीएम कृषि सिंचाई योजना से जुड़ी कोई समस्या है, तो आप संबंधित विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।