अगर आप कहीं बाल मज़दूरी (Child Labour) होते हुए देखें, तो यहाँ ऑनलाइन शिकायत करें और बच्चों को बचाएं।
यहाँ PENCIL पोर्टल (Platform for Effective Enforcement for No Child Labour) के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी गई है:
अक्सर हम किसी ढाबे पर 'छोटू' को चाय देते हुए देखते हैं, या गैरेज (Garage) में छोटे बच्चों को काम करते देखते हैं। हम बुरा तो मानते हैं, लेकिन हमें पता नहीं होता कि शिकायत पुलिस को करें या किसी NGO को?
भारत सरकार ने इसी उलझन को खत्म करने के लिए PENCIL पोर्टल बनाया है। यह पोर्टल केंद्र सरकार, राज्य सरकार, ज़िला अधिकारी (DM/DC), और आम जनता को एक ही प्लेटफार्म पर जोड़ता है।
भारत में बाल श्रम (Child Labour) एक संज्ञेय और गैर-जमानती (Non-bailable) अपराध है। कानून (Child Labour Prohibition Act) के अनुसार बच्चों को दो श्रेणियों में बांटा गया है:
| उम्र (Age Group) | कानूनी नियम (Legal Rules) |
|---|---|
| 1. 14 साल से कम उम्र के बच्चे (Child) | 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का कोई भी काम करवाना (चाहे वह ढाबा हो या घर की साफ़-सफाई) पूरी तरह से बैन (Banned) है। (अपवाद: स्कूल के बाद अपने पारिवारिक बिज़नेस में हाथ बंटाना)। |
| 2. 14 से 18 साल के किशोर (Adolescent) | इनसे सामान्य काम करवाया जा सकता है, लेकिन 'खतरनाक उद्योगों' (Hazardous Occupations) जैसे खदान (Mines), पटाखा फैक्ट्री, कांच फैक्ट्री, या केमिकल फैक्ट्री में काम करवाना पूर्ण रूप से अपराध है। |
सज़ा (Punishment): अगर कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करके बच्चों से मज़दूरी करवाता है, तो उसे 6 महीने से लेकर 2 साल तक की जेल और ₹20,000 से ₹50,000 तक का जुर्माना हो सकता है।
अगर आप कहीं बाल मज़दूरी होते हुए देखते हैं, तो PENCIL पोर्टल पर 'Complaint Corner' के माध्यम से आप सीधे ज़िला नोडल अधिकारी (DNO) को अलर्ट भेज सकते हैं:
कई बार लोग सोचते हैं कि "ऑनलाइन शिकायत करने से क्या ही होगा?", लेकिन PENCIL पोर्टल बहुत ही पावरफुल सिस्टम है, जो इस तरह काम करता है:
प्र. क्या शिकायत करने पर पुलिस मुझे पूछताछ के लिए बार-बार थाने बुलाएगी?
उ. नहीं! यह PENCIL पोर्टल की सबसे बड़ी खूबी है। अगर आप एक आम नागरिक के तौर पर पोर्टल पर शिकायत करते हैं, तो पुलिस का काम सिर्फ आपकी दी गई लोकेशन पर जाकर जांच करना है। शिकायतकर्ता (Complainant) की पहचान गुप्त रखी जाती है और उसे कोर्टচেতন या थाने के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
प्र. मैं इंटरनेट का उपयोग नहीं कर सकता, मैं फोन पर शिकायत कैसे करूँ?
उ. अगर आप वेबसाइट का इस्तेमाल नहीं कर सकते, तो आप तुरंत भारत सरकार की चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 (टोल-फ्री नंबर) पर कॉल कर सकते हैं। वे तुरंत वहां रेस्क्यू टीम भेज देंगे।
प्र. क्या बच्चे के माता-पिता पर भी केस (FIR) होता है?
उ. पहली बार पकड़े जाने पर माता-पिता पर कोई केस नहीं होता है (क्योंकि गरीबी के कारण ही वे ऐसा करते हैं)। उन्हें सिर्फ काउंसलिंग (समझाया) दी जाती है। लेकिन अगर माता-पिता बार-बार जानबूझकर बच्चे को काम पर भेजें, तो उन पर जुर्माना हो सकता है। सज़ा सिर्फ काम देने वाले 'मालिक' (Employer) को होती है।
बाल मज़दूरी हमारे समाज पर एक कलंक है। जब भी आप किसी बच्चे को अपने बचपन को खोकर काम करते देखें, तो उसे सिर्फ 10-20 रुपये की टिप देकर आगे न बढ़ें, क्योंकि यह उस बच्चे का भविष्य नहीं बदलेगा।
इसके बजाय, अपने स्मार्टफोन से PENCIL पोर्टल (pencil.gov.in) पर सिर्फ 2 मिनट निकालकर एक शिकायत दर्ज़ करें। आपकी एक छोटी सी कोशिश किसी बच्चे को फैक्ट्री के अंधेरे से निकालकर स्कूल की रोशनी तक पहुंचा सकती है।
PENCIL पोर्टल (pencil.gov.in) पर जाएं।
"Complaint Corner" पर क्लिक करें।
जिस जगह बच्चा काम कर रहा है (दुकान/फैक्ट्री) उसका पता और फोटो (यदि हो) अपलोड करें।
जिला नोडल अधिकारी (DNO) तुरंत पुलिस के साथ वहां पहुंचकर बच्चे को रेस्क्यू (Rescue) करेंगे और मालिक पर FIR होगी।
हाँ, इस पोर्टल पर शिकायत दर्ज़ करते समय आपकी पहचान (Identity) को पूरी तरह से गुप्त रखा जाता है ताकि आपको कोई परेशानी न हो।
बिना किसी रुकावट के सीधे सरकारी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें।
नोट: किसी भी सरकारी सेवा के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें।
JanSarkari.com आपको सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करता है। यदि आपको PENCIL पोर्टल (Child Labour) से जुड़ी कोई समस्या है, तो आप संबंधित विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।