गांव के हर परिवार को साल में 100 दिन के रोज़गार (मज़दूरी) की कानूनी गारंटी। जानिए जॉब कार्ड कैसे बनाएं और ऑनलाइन लिस्ट कैसे देखें।
यहाँ मनरेगा (MGNREGA - Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act) के बारे में अत्यंत विस्तृत और सम्पूर्ण जानकारी (3000+ शब्द) दी गई है:
अगर आप गांव में रहते हैं और शारीरिक श्रम (Unskilled Manual Labour) करने के लिए तैयार हैं, तो सरकार को आपको काम देना ही पड़ेगा, वरना सरकार को हर्जाना (बेरोजगारी भत्ता) देना होगा!
मनरेगा मज़दूरों को ऐसे अधिकार देता है, जो प्राइवेट सेक्टर तो क्या, कई सरकारी नौकरियों में भी नहीं मिलते। हर मज़दूर को अपने इन हकों (Rights) के बारे में पता होना चाहिए:
| अधिकार / नियम (Rules) | विवरण (Description) |
|---|---|
| 1. 15 दिन में काम की गारंटी | अगर आपने काम के लिए आवेदन किया है, तो पंचायत को आपको 15 दिन के अंदर काम देना ही होगा। |
| 2. बेरोजगारी भत्ता (Unemployment Allowance) | अगर सरकार 15 दिन में काम देने में फेल हो जाती है, तो राज्य सरकार को अपनी जेब से मज़दूर को घर बैठे "बेरोजगारी भत्ता" देना होगा (पहले 30 दिन के लिए मज़दूरी का 25%, और उसके बाद 50%)। |
| 3. गांव के 5 किलोमीटर के अंदर काम | मज़दूर को उसके घर से 5 KM के दायरे में ही काम दिया जाएगा। अगर काम 5 KM से दूर है, तो मज़दूर को आने-जाने के लिए 10% अतिरिक्त मज़दूरी (Extra Wage) मिलेगी। |
| 4. 15 दिन में पेमेंट (Wage Payment) | मज़दूरी का पैसा (Payment) काम खत्म होने के 15 दिन के भीतर सीधा बैंक खाते (DBT) में आ जाना चाहिए। अगर इसमें देरी होती है, तो मज़दूर Compensation (मुआवजा - 0.05% रोज़ाना) का हकदार होता है। |
| 5. महिलाओं के लिए विशेष नियम | नियम है कि कुल जॉब कार्ड धारकों में कम से कम एक-तिहाई (33%) महिलाएं होनी चाहिए। अगर साइट पर 5 से ज़्यादा बच्चे हैं, तो एक महिला को आया (Creche) के रूप में तैनात किया जाता है (उसे भी पूरी मज़दूरी मिलती है)। |
| 6. समान काम, समान वेतन | महिला और पुरुष मज़दूरों को एक समान काम के लिए बिल्कुल बराबर (Equal) मज़दूरी दी जाती है। कोई भेदभाव नहीं। |
मनरेगा का उद्देश्य सिर्फ मज़दूरी देना नहीं है, बल्कि गांव में ऐसी संपत्तियां (Assets) बनाना है जो सालों तक काम आएं। इसके तहत आमतौर पर निम्नलिखित काम कराए जाते हैं:
जॉब कार्ड (Job Card) वह पासबुक है जिसमें मज़दूर की फोटो, परिवार की जानकारी और काम का पूरा रिकॉर्ड होता है। इसे बनवाने की प्रक्रिया बिल्कुल ऑफलाइन (Offline) और मुफ्त है:
ध्यान दें: जॉब कार्ड पर मुखिया (Head of Household) का नाम होता है, लेकिन उसमें पूरे परिवार के वयस्कों के नाम जुड़े होते हैं। कोई भी सदस्य जाकर काम मांग सकता है, लेकिन पूरे परिवार को मिलाकर साल में केवल 100 दिन का ही काम मिलेगा।
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मनरेगा के सारे रजिस्टर ऑनलाइन (Public) कर दिए हैं। कोई भी व्यक्ति घर बैठे अपने गांव की लिस्ट निकाल सकता है:
मनरेगा में पहले बहुत भ्रष्टाचार (Fake musters) होता था—प्रधान ऐसे लोगों के नाम पर भी पैसे निकाल लेते थे जो शहर में नौकरी कर रहे हैं या जिनकी मौत हो चुकी है। इसे रोकने के लिए सरकार ने 2 बहुत कड़े नियम लागू किए हैं:
मनरेगा की मज़दूरी पूरे देश में एक समान नहीं होती। हर राज्य की महंगाई के हिसाब से केंद्र सरकार हर साल 1 अप्रैल को नया रेट तय करती है। (उदाहरण के तौर पर कुछ राज्यों की स्थिति - यह राशि हर साल बढ़ती है):
प्र. मैं एक ठेकेदार हूँ, क्या मैं मनरेगा के काम में JCB मशीन लगा सकता हूँ?
उ. बिल्कुल नहीं! मनरेगा का कानून साफ़ कहता है कि इसमें केवल अकुशल शारीरिक श्रम (Manual labour) का उपयोग होगा। किसी भी काम में JCB या बड़ी मशीनों का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित (Banned) है। अगर कोई प्रधान JCB से तालाब खुदवाता है, तो यह गैर-कानूनी है और उस पर FIR दर्ज हो सकती है।
प्र. क्या मनरेगा में काम करने के लिए कोई शैक्षिक योग्यता (Education) चाहिए?
उ. नहीं। मनरेगा अकुशल (Unskilled) कामगारों के लिए है। अनपढ़ से लेकर ग्रेजुएट तक, कोई भी 18 साल से ऊपर का नागरिक जो गांव में रहता है, इसका लाभ ले सकता है।
प्र. काम मांगने की प्रक्रिया (Process to demand work) क्या है?
उ. केवल जॉब कार्ड होना काफी नहीं है। आपको ग्राम पंचायत में एक लिखित फॉर्म (फॉर्म-6) देना होता है कि "मैं फलां तारीख से काम करना चाहता हूँ"। प्रधान आपको एक रसीद देगा। उसी रसीद की तारीख से 15 दिन की गिनती शुरू होती है। अगर आप मौखिक (मुंह से) काम मांगेंगे और कोई रसीद नहीं लेंगे, तो आपको कभी 'बेरोजगारी भत्ता' नहीं मिलेगा।
मनरेगा (MGNREGA) ग्रामीण भारत की एक संजीवनी (Lifeline) है। यह मज़दूरों को अपने ही गांव में, परिवार के साथ रहकर सम्मानजनक रोज़गार कमाने का अवसर देता है।
अगर आपके पास जॉब कार्ड नहीं है, तो आज ही अपने ग्राम पंचायत कार्यालय में जाएं और इसके लिए आवेदन करें। और अगर आपके गांव का प्रधान मनरेगा के काम में मशीनें लगवाता है या फर्जी मस्टर रोल भरता है, तो आप 'सोशल ऑडिट (Social Audit)' के दौरान या ब्लॉक में BDO (Block Development Officer) से इसकी शिकायत कर सकते हैं।
ग्राम पंचायत (प्रधान/सरपंच) या ग्राम रोज़गार सेवक (GRS) के पास जाकर एक सादा फॉर्म भरें।
अपने परिवार के सभी वयस्क (18+) सदस्यों के नाम, आधार कार्ड, फोटो और बैंक पासबुक की कॉपी जमा करें।
15 दिन के अंदर आपको अपना NREGA Job Card (मनरेगा जॉब कार्ड) मिल जाएगा।
अपना नाम ऑनलाइन लिस्ट में देखने के लिए nrega.nic.in पोर्टल पर जाएं और अपने राज्य व पंचायत की जॉब कार्ड लिस्ट डाउनलोड करें।
सामान्य तौर पर एक परिवार (पूरे परिवार को मिलाकर) को 100 दिन का ही काम मिलता है। लेकिन अगर आपके इलाके में सूखा (Drought) या भारी बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा (Natural Calamity) घोषित हो जाए, तो सरकार 50 दिन का अतिरिक्त काम (कुल 150 दिन) भी दे सकती है।
मनरेगा एक 'कानूनी अधिकार' है। अगर आपने ग्राम पंचायत में काम की मांग की है (लिखित में रसीद ली है), और 15 दिन के अंदर आपको काम नहीं मिलता है, तो राज्य सरकार को आपको 'बेरोजगारी भत्ता (Unemployment Allowance)' देना पड़ेगा।
हर राज्य की मनरेगा मज़दूरी अलग-अलग होती है (जैसे हरियाणा में 374 रुपये/दिन, जबकि कुछ राज्यों में 230 रुपये/दिन)। यह पैसा 15 दिन के अंदर सीधे मज़दूर के आधार-लिंक्ड बैंक खाते (ABPS / DBT) में ट्रांसफर होता है। कोई भी ठेकेदार नकद पैसा (Cash) नहीं दे सकता।
बिना किसी रुकावट के सीधे सरकारी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें।
नोट: किसी भी सरकारी सेवा के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें।
JanSarkari.com आपको सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करता है। यदि आपको मनरेगा (MGNREGA) जॉब कार्ड से जुड़ी कोई समस्या है, तो आप संबंधित विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।