पशुओं के गोबर और जैविक कचरे से बायोगैस (Biogas) तथा जैविक खाद बनाकर अतिरिक्त कमाई करने की सरकारी योजना।
यहाँ गोबरधन योजना (GOBARdhan Yojana) के बारे में अत्यंत विस्तृत और सम्पूर्ण जानकारी (3000+ शब्द) दी गई है:
पहले गांवों में गोबर को यूं ही रास्तों या खेतों के किनारे फेंक दिया जाता था, जिससे बीमारियां फैलती थीं और मीथेन गैस पर्यावरण को नुकसान पहुंचाती थी। अब वही गोबर किसानों के लिए 'धन' (Dhan) बन गया है, जिसे बेचकर वे अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं।
सरकार ने इस योजना को सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) का इंजन बनाने की कोशिश की है:
सरकार ने गांवों की आबादी और जानवरों की संख्या के हिसाब से बायोगैस प्लांट लगाने के अलग-अलग मॉडल बनाए हैं:
| मॉडल का प्रकार (Model) | विवरण (Description) |
|---|---|
| 1. व्यक्तिगत प्लांट (Individual Household) | अगर किसी एक किसान के पास 4 से 6 गाय/भैंस हैं, तो वह अपने घर के पिछवाड़े में एक छोटा बायोगैस प्लांट (1 से 2 घन मीटर) लगा सकता है। इससे उस एक परिवार के दो वक्त का खाना पकने भर की गैस मिल जाती है। |
| 2. क्लस्टर मॉडल (Cluster Model) | अगर गांव में 3-4 घर पास-पास हैं और सबके पास जानवर हैं, तो वे मिलकर एक साझा प्लांट लगा सकते हैं। गैस को पाइपलाइन के ज़रिए सभी घरों की रसोई तक पहुँचाया जाता है। |
| 3. सामुदायिक प्लांट (Community Model) | पूरे गांव या ग्राम पंचायत के लिए एक बड़ा प्लांट (Community Biogas Plant)। इसमें पूरे गांव के लोग अपना गोबर लाते हैं। इससे बनने वाली गैस का इस्तेमाल पूरे गांव को सप्लाई करने या बिजली बनाने में किया जाता है। |
| 4. व्यावसायिक CBG प्लांट (Commercial CBG) | यह बड़े उद्यमियों (Entrepreneurs/Companies) द्वारा लगाया जाता है। इसमें हज़ारों टन गोबर और पराली से Compressed Bio Gas (CBG) बनाई जाती है, जिसे CNG पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों में भरने के लिए बेचा जाता है! |
यह सबसे महत्वपूर्ण सवाल है कि प्लांट लगाने का खर्च कौन उठाएगा?
बजट 2023-24 में सरकार ने एक नई घोषणा की। जब बायोगैस निकल जाती है, तो जो लिक्विड या सूखा कचरा बचता है उसे FOM (Fermented Organic Manure) कहते हैं। सरकार ने घोषणा की है कि जो भी प्लांट यह जैविक खाद बनाएगा, उसे 1,500 रुपये प्रति मीट्रिक टन की 'मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस' (MDA) सब्सिडी दी जाएगी, ताकि यह खाद किसानों को बहुत सस्ते दाम पर मिल सके।
गोबरधन योजना केवल पर्यावरण की नहीं, बल्कि 'किसानों की जेब' भरने की योजना है:
योजना के तहत आवेदन की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि आप किस स्तर का प्लांट लगाना चाहते हैं:
प्र. क्या मेरे घर में 2 गाय हैं, मैं अपने घर में प्लांट लगाने के लिए सरकार से पैसे ले सकता हूँ?
उ. सरकार पहले छोटे 'व्यक्तिगत प्लांट्स' (Individual plants) पर 12,000 रुपये तक की सब्सिडी देती थी (MNRE के NBMMP स्कीम के तहत)। लेकिन अब GOBARdhan योजना के तहत फोकस बड़े और क्लस्टर/सामुदायिक (Community) प्लांट्स पर है, क्योंकि छोटे प्लांट कुछ साल बाद खराब होकर बंद हो जाते थे। हालांकि, आप अपने ज़िले के 'कृषि विज्ञान केंद्र (KVK)' या 'ज़िला पंचायत' कार्यालय में जाकर व्यक्तिगत प्लांट की ताज़ा राज्य स्तरीय सब्सिडी की जानकारी ले सकते हैं।
प्र. CBG (Compressed Bio Gas) और CNG में क्या अंतर है?
उ. रासायनिक तौर पर दोनों लगभग समान (मीथेन गैस) हैं। CNG (Compressed Natural Gas) ज़मीन के नीचे से पेट्रोलियम के साथ निकलती है (जो खत्म हो रही है)। जबकि CBG कचरे और गोबर को सड़ाकर बनाई जाती है (जो पर्यावरण के अनुकूल और नवीकरणीय/Renewable है)। CBG को गाड़ियों (ऑटो, कार) में सीएनजी की तरह ही इस्तेमाल किया जा सकता है।
प्र. मैं गोबर गैस प्लांट से निकलने वाली लिक्विड खाद (Slurry) को कैसे बेच सकता हूँ?
उ. GOBARdhan योजना के तहत सरकार ने फर्टिलाइज़र कंपनियों (जैसे IFFCO, KRIBHCO) के लिए यह अनिवार्य/प्रोत्साहित किया है कि वे बायोगैस प्लांट मालिकों के साथ करार (Tie-up) करें। आप अपनी स्लरी की मार्केटिंग करके इसे पैकिंग में पास के किसानों या नर्सरी (Nursery) वालों को सीधे भी बेच सकते हैं।
प्र. क्या बायोगैस प्लांट लगाने के लिए बहुत ज़मीन की आवश्यकता होती है?
उ. यह प्लांट की क्षमता पर निर्भर करता है। एक छोटे घर (2 घन मीटर) के प्लांट के लिए मात्र 10x10 फुट की ज़मीन चाहिए। लेकिन कमर्शियल CBG प्लांट (100 टन प्रतिदिन गोबर की खपत वाले) के लिए 2 से 3 एकड़ ज़मीन की आवश्यकता होती है।
GOBARdhan योजना (गोबरधन योजना) भारत के गांवों को आत्मनिर्भर (Atmanirbhar) और स्वच्छ बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह योजना साबित करती है कि अगर सही तकनीक का इस्तेमाल किया जाए, तो कचरा (Waste) कोई समस्या नहीं, बल्कि आय (Income) का एक बड़ा स्रोत है।
अगर आप एक प्रगतिशील किसान (Progressive Farmer) या युवा उद्यमी (Youth Entrepreneur) हैं, तो बायोगैस और CBG सेक्टर भविष्य का एक बहुत बड़ा बिज़नेस है। अपनी ग्राम पंचायत से बात करें, अपना स्वयं सहायता समूह (SHG) या FPO बनाएं और गांव में गोबर गैस प्लांट लगाकर तरक्की की नई राह खोलें!
अगर आप गांव में बायोगैस प्लांट लगाना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपनी ग्राम पंचायत या ब्लॉक स्तर पर प्रस्ताव दें।
कमर्शियल (CBG) प्लांट लगाने वाले उद्यमी (Entrepreneurs) GOBARdhan पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
सरकार द्वारा गांव के प्लांट के लिए 50 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता (Financial Assistance) दी जाती है।
इससे गांव साफ रहेगा, किसानों को मुफ्त कुकिंग गैस मिलेगी और जैविक खाद (Organic Manure) खेतों में यूरिया की जगह इस्तेमाल होगी।
ग्राम पंचायतें, स्वयं सहायता समूह (SHGs), किसान उत्पादक संगठन (FPOs), डेयरी कोऑपरेटिव्स, और प्राइवेट उद्यमी (Entrepreneurs) जो बायोगैस/CBG प्लांट लगाना चाहते हैं, इस योजना का लाभ ले सकते हैं।
जी हाँ! किसान अपने पशुओं का फालतू गोबर और खेत का कचरा (पराली आदि) प्लांट में बेचकर सीधे पैसे कमा सकते हैं। साथ ही, प्लांट से निकलने वाली जैविक खाद (Slurry) को बेचकर भी अतिरिक्त कमाई होती है।
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नोट: किसी भी सरकारी सेवा के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें।
JanSarkari.com आपको सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करता है। यदि आपको गोबरधन योजना (GOBARdhan Yojana) से जुड़ी कोई समस्या है, तो आप संबंधित विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।