अगर कोई कंपनी आपके साथ धोखा करती है, तो सीधे कंज्यूमर कोर्ट (Consumer Commission) में ऑनलाइन मुक़दमा (Case) दर्ज़ करना।
यहाँ ई-दाखिल (e-Daakhil) के माध्यम से कंज्यूमर कोर्ट में केस करने के बारे में सम्पूर्ण जानकारी दी गई है:
अगर आपने किसी कंपनी, बिल्डर, अस्पताल, ई-कॉमर्स वेबसाइट (जैसे Amazon, Flipkart) या किसी भी सर्विस प्रोवाइडर (Service Provider) को पैसे दिए हैं, लेकिन उन्होंने आपके साथ धोखा किया है या खराब सर्विस दी है, तो 'Consumer Protection Act' के तहत आप उनके खिलाफ आवाज़ उठा सकते हैं।
आमतौर पर सबसे पहले लोग National Consumer Helpline (NCH / 1915) पर शिकायत करते हैं। लेकिन अगर कंपनी NCH की शिकायत को नज़रंदाज़ कर दे या मामला न सुलझाए, तो अगला और सबसे ठोस कदम होता है ई-दाखिल (e-Daakhil) पोर्टल के ज़रिए कंपनी को लीगल नोटिस भेजना और उपभोक्ता अदालत (Consumer Commission) में केस ठोकना।
कई लोग कन्फ्यूज़ रहते हैं कि जब NCH (1915) पर शिकायत कर दी, तो ई-दाखिल पर दोबारा क्यों जाना है। इसे ऐसे समझें:
| National Consumer Helpline (NCH) | e-Daakhil (ई-दाखिल) |
|---|---|
| यह एक हेल्पलाइन (मध्यस्थता) है। यह कंपनी को सिर्फ एक सलाह या ईमेल भेजती है कि वह ग्राहक की समस्या सुलझाए। | यह एक कानूनी अदालत (Court) है। यह कंपनी को समन (Summons) भेजती है और कंपनी को कोर्ट में हाज़िर होना पड़ता है। |
| अगर कंपनी NCH की बात न माने, तो NCH कंपनी को सज़ा नहीं दे सकता। | अगर कंपनी कोर्ट में नहीं आती या दोषी पाई जाती है, तो जज उस पर भारी जुर्माना (Penalty) और सज़ा लगा सकता है। |
| यह बिल्कुल फ्री है। | यहाँ केस की कीमत के हिसाब से एक मामूली कोर्ट फीस लगती है (हालांकि 5 लाख तक के केस यहाँ भी मुफ़्त हैं)। |
सीधे पोर्टल पर जाकर केस दर्ज़ करने से पहले आपको कुछ कानूनी औपचारिकताएँ (Legal Formalities) पूरी करनी होती हैं:
एक बार जब आपके PDF डॉक्युमेंट्स तैयार हो जाएँ, तो निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाएं:
सबमिट करने के बाद, आपकी फाइल उस ज़िले के उपभोक्ता आयोग (District Consumer Commission) के क्लर्क के पास चली जाएगी। अगर सारे दस्तावेज़ सही पाए गए, तो केस "Admit" हो जाएगा और आपको एक केस नंबर (Case Number) और सुनवाई की पहली तारीख (Hearing Date) मिल जाएगी।
नए Consumer Protection Act, 2019 के अनुसार, ई-दाखिल पर कोर्ट फीस बहुत ही कम रखी गई है:
(नोट: यह फीस डिमांड ड्राफ्ट (DD) या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सीधे कोर्ट में जमा होती है।)
प्र. क्या ई-दाखिल पोर्टल पर केस करने के लिए मुझे वकील (Lawyer) की ज़रूरत पड़ेगी?
उ. नहीं! उपभोक्ता संरक्षण कानून (Consumer Protection Act) इसी तरह बनाया गया है कि एक आम आदमी खुद अपनी लड़ाई लड़ सके। आप ई-दाखिल पर खुद केस फाइल कर सकते हैं और कोर्ट में जज के सामने अपनी बात (In Person) खुद रख सकते हैं। हालाँकि, अगर कंपनी का वकील बहुत चालाक हो या केस पेचीदा हो, तो आप अपनी मदद के लिए वकील कर सकते हैं।
प्र. केस फाइल करने की समय सीमा (Time Limit) क्या है?
उ. आपको धोखाधड़ी होने (या कंपनी द्वारा रिफंड देने से मना करने) की तारीख से 2 साल (2 Years) के भीतर ही कंज्यूमर कोर्ट में केस फाइल करना होता है। 2 साल बीत जाने के बाद कोर्ट केस को खारिज कर सकता है।
प्र. ई-दाखिल पर केस करने के बाद मुझे कोर्ट (Court Room) जाना पड़ेगा?
उ. जी हाँ। ई-दाखिल (e-Daakhil) सिर्फ केस को फाइल (जमा) करने का एक ऑनलाइन तरीका है। जब जज आपको सुनवाई (Hearing) की तारीख देंगे, तो आपको (या आपके वकील को) उस तारीख पर उस ज़िले के कोर्ट रूम में मौजूद रहना होगा। (कुछ राज्यों में अब Video Conferencing की सुविधा भी शुरू हो गई है)।
प्र. अगर मुझे समझ नहीं आ रहा कि Petition कैसे लिखें, तो क्या करूँ?
उ. आप इंटरनेट से 'Consumer Complaint format doc' सर्च करके एक ड्राफ्ट डाउनलोड कर सकते हैं और उसमें अपने केस की कहानी भर सकते हैं। या फिर आप किसी भी ज़िला अदालत के बाहर बैठे टाइपिस्ट/नोटरी वाले से 200-300 रुपये देकर एक अच्छी Petition टाइप करवा सकते हैं।
अगर NCH पर शिकायत करने के बाद भी कंपनी आपकी बात नहीं सुन रही है, तो ई-दाखिल (e-Daakhil) आपके पास एक बेहतरीन कानूनी हथियार है। बहुत सी कंपनियाँ (विशेषकर ई-कॉमर्स साइट्स या बिल्डर्स) कस्टमर केयर पर आपको टरकाती रहती हैं, लेकिन जैसे ही उनके पास कोर्ट का नोटिस (Court Notice) पहुँचता है, वे 1-2 दिन के अंदर ही सेटलमेंट करने को तैयार हो जाती हैं।
इसलिए, अपने उपभोक्ता अधिकारों (Consumer Rights) को पहचानें। अगर कोई कंपनी आपके साथ धोखा करे, तो घर बैठे e-Daakhil पोर्टल पर जाएँ और अपने लिए न्याय मांगें!
ई-दाखिल पोर्टल (edaakhil.nic.in) पर जाएं। (यह NCH हेल्पलाइन से अलग, एक कानूनी प्रक्रिया है)।
अपना अकाउंट बनाएं और "File a New Case" विकल्प चुनें।
शिकायत पत्र (Complaint Petition), नोटिस की कॉपी, बिल और सबूत पीडीएफ (PDF) में अपलोड करें।
क्लेम की राशि के अनुसार ऑनलाइन फीस (5 लाख तक मुफ़्त) जमा करें। केस मंजूर होने पर आपको कोर्ट की तारीख मिल जाएगी।
नहीं, कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत आप ई-दाखिल पोर्टल के ज़रिए खुद ही अपना केस फाइल कर सकते हैं और कोर्ट में बहस भी कर सकते हैं।
बिना किसी रुकावट के सीधे सरकारी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें।
JanSarkari.com आपको सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करता है। यदि आपको ई-दाखिल (कंज्यूमर कोर्ट) से जुड़ी कोई समस्या है, तो आप संबंधित विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।