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Uttar Pradesh (उत्तर प्रदेश) यूपी घरौनी / स्वामित्व योजना (Gharauni): सम्पूर्ण जानकारी और ऑनलाइन आवेदन

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में पीढ़ियों से एक बहुत बड़ी समस्या चली आ रही थी— आबादी की ज़मीन (Residential Land) का मालिकाना हक़ (Ownership)। गाँवों में किसानों के पास खेती की ज़मीन के कागज़ (खतौनी) तो होते हैं, लेकिन जिस ज़मीन पर उनका पुश्तैनी घर बना होता है, उसका कोई पक्का कागज़ या कानूनी दस्तावेज़ उनके पास नहीं होता था।

इसी समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए केंद्र सरकार ने 'प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना (PM SVAMITVA Yojana)' की शुरुआत की, जिसे उत्तर प्रदेश सरकार ने 'यूपी घरौनी (UP Gharauni)' के नाम से बहुत ही सफलतापूर्वक लागू किया है। अब राज्य के हर ग्रामीण परिवार को उनके घर का पक्का कागज़ यानी 'ग्रामीण प्रॉपर्टी कार्ड (Rural Property Card)' दिया जा रहा है।

इस विस्तृत लेख में हम जानेंगे कि घरौनी क्या है, खतौनी और घरौनी में क्या अंतर है, ड्रोन (Drone) से गाँव का सर्वे कैसे होता है, घरौनी के क्या-क्या फायदे हैं, और आप घर बैठे ऑनलाइन अपनी घरौनी (Gharauni) कैसे डाउनलोड कर सकते हैं।


1. घरौनी (Gharauni) या स्वामित्व योजना क्या है?

'स्वामित्व योजना (SVAMITVA - Survey of Villages and Mapping with Improvised Technology in Village Areas)' पंचायती राज मंत्रालय (भारत सरकार) की एक योजना है, जिसे अप्रैल 2020 में लॉन्च किया गया था। उत्तर प्रदेश में इस योजना के अंतर्गत तैयार किए गए दस्तावेज़ को 'घरौनी (Gharauni)' कहा जाता है।

सरल भाषा में समझें: जिस तरह खेतों के मालिकाना हक़ के कागज़ को खतौनी (Khatauni) कहते हैं, ठीक उसी तरह गाँव में बने आपके घर (आबादी की ज़मीन) के मालिकाना हक़ के कागज़ को घरौनी (Gharauni) कहा जाता है।

इस योजना के तहत राजस्व विभाग और सर्वे ऑफ इंडिया (Survey of India) मिलकर ड्रोन कैमरों की मदद से गाँवों की आबादी (Residential Area) का नक्शा बनाते हैं और प्रत्येक घर/प्लॉट की पैमाइश करके उसके मालिक को एक 'प्रॉपर्टी कार्ड (Property Card)' या 'घरौनी प्रमाण पत्र' सौंपते हैं।


2. खतौनी (Khatauni) और घरौनी (Gharauni) में क्या अंतर है?

गाँव के लोगों के बीच अक्सर यह कन्फ्यूजन रहता है कि जब उनके पास खतौनी है, तो घरौनी की क्या आवश्यकता है? इन दोनों में बहुत बड़ा कानूनी अंतर है:

विवरण (Description)खतौनी (Khatauni)घरौनी (Gharauni)
क्या है?यह कृषि भूमि (खेती की ज़मीन) का रिकॉर्ड है।यह आबादी की ज़मीन (जिस पर घर बना है) का रिकॉर्ड है।
उपयोगखेत का मालिकाना हक़ साबित करने के लिए।घर या रिहायशी प्लॉट का मालिकाना हक़ साबित करने के लिए।
सर्वे का तरीकाज़मीन की नाप लेखपाल द्वारा ज़रीब/फीते से की जाती है।घरों की नाप ड्रोन (Drone) और सॅटेलाइट (GIS) मैपिंग से की जाती है।
लोन की सुविधाखतौनी पर KCC (किसान क्रेडिट कार्ड) या एग्रीकल्चर लोन मिलता है।घरौनी पर बैंक से होम लोन (Home Loan) या प्रॉपर्टी पर लोन (LAP) मिल सकता है।

3. घरौनी (UP Gharauni) के मुख्य लाभ (Benefits) क्या हैं?

गाँव में रहने वाले लोगों के लिए घरौनी (प्रॉपर्टी कार्ड) एक गेम-चेंजर साबित हो रही है। इसके लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में निम्नलिखित बड़े बदलाव आ रहे हैं:

  1. बैंक लोन में सुविधा (Access to Bank Loans): पहले गाँव के घर पर बैंक लोन नहीं देते थे क्योंकि घर का कोई कानूनी कागज़ नहीं होता था। अब घरौनी (Property Card) दिखाकर ग्रामीण लोग भी शहर के लोगों की तरह अपने घर पर होम लोन, एजुकेशन लोन या बिज़नेस लोन आसानी से ले सकते हैं।
  2. ज़मीनी विवादों का खात्मा (End of Disputes): गाँवों में भाई-भतीजों और पड़ोसियों के बीच मेड़, नाली या छज्जे को लेकर बहुत लड़ाई-झगड़े (Boundary Disputes) होते हैं। ड्रोन से सटीक नाप होने के बाद हर व्यक्ति की सीमा तय हो गई है, जिससे कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में भारी कमी आई है।
  3. संपत्ति की सही कीमत (Increase in Property Value): जब किसी घर का पक्का कागज़ बन जाता है, तो उसकी कानूनी मान्यता (Legal Validity) बढ़ जाती है, जिससे उसे बेचने (Registry करने) पर बाज़ार में उसकी अच्छी कीमत मिलती है।
  4. ग्राम पंचायत का विकास (Gram Panchayat Development): ड्रोन सर्वे के दौरान ग्राम पंचायत की सरकारी संपत्तियों (जैसे- पंचायत भवन, स्कूल, तालाब, चारागाह) का भी नक्शा बन जाता है, जिससे सरकारी ज़मीन पर होने वाले अवैध कब्ज़ों (Encroachment) को रोकना आसान हो गया है।
  5. पारदर्शिता (Transparency): घरौनी बनने के बाद गाँव की हर संपत्ति का रिकॉर्ड ऑनलाइन (Digitized) हो जाता है, जिसे कभी भी देखा जा सकता है।

4. स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे (Drone Survey) कैसे होता है?

उत्तर प्रदेश में घरौनी बनाने की प्रक्रिया बहुत ही आधुनिक (High-Tech) और पारदर्शी है। राजस्व विभाग (Revenue Department) निम्नलिखित चरणों में सर्वे का काम पूरा करता है:

  1. चूना मार्किंग (Chuna Marking): सर्वे की तारीख तय होने के बाद, गाँव वालों को सूचना दी जाती है कि वे अपने-अपने घरों, अहातों (Boundaries) और प्लॉट के कोनों पर सफेद चूना (White Lime) डाल लें, ताकि आसमान से घर की सीमाएँ स्पष्ट दिखें।
  2. ड्रोन फ्लाइंग (Drone Flying): सर्वे ऑफ इंडिया की टीम गाँव के ऊपर ड्रोन (Drone) उड़ाती है। ड्रोन हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे (High-resolution cameras) से पूरे गाँव की आबादी का डिजिटल नक्शा (GIS Map) खींच लेता है।
  3. नक्शा तैयार करना (Draft Mapping): ड्रोन की तस्वीरों को कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर में डालकर हर घर का क्षेत्रफल (Area) निकाला जाता है और उसे एक नंबर (Gharauni Number) दिया जाता है।
  4. सत्यापन और आपत्तियां (Verification & Objections): लेखपाल गाँव में आकर एक कच्ची लिस्ट (Draft List) चस्पा करता है। यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके घर की नाप गलत हुई है या किसी और का नाम दर्ज हो गया है, तो वह आपत्ति (Objection) दर्ज करा सकता है।
  5. अंतिम घरौनी वितरण (Final Distribution): आपत्तियों के निपटारे के बाद फाइनल घरौनी (Final Rural Property Card) प्रिंट की जाती है और मुख्यमंत्री या ज़िलाधिकारी (DM) द्वारा ग्राम प्रधान की उपस्थिति में ग्रामीणों को वितरित की जाती है।

5. UP Gharauni ऑनलाइन कैसे चेक और डाउनलोड करें? (How to Download Gharauni)

उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए घरौनी (Gharauni Certificate) को ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध करा दिया है। यदि आपके गाँव का सर्वे पूरा हो चुका है, तो आप नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके अपनी घरौनी डाउनलोड कर सकते हैं:

Step 1: UP Bhulekh की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ

अपने मोबाइल या कंप्यूटर के ब्राउज़र में UP Bhulekh की आधिकारिक वेबसाइट upbhulekh.gov.in को खोलें।

Step 2: "UP Gharauni / घरौनी" के विकल्प पर क्लिक करें

होमपेज पर आपको बहुत सारे विकल्प दिखेंगे। उनमें से "ग्रामीण आबादी (घरौनी) का विवरण" या "Gharauni Download" वाले लिंक पर क्लिक करें। (आप सीधे राजस्व परिषद की वेबसाइट bor.up.nic.in पर भी जा सकते हैं)।

Step 3: अपना जिला, तहसील और ग्राम चुनें

  • जनपद (District): ड्रॉपडाउन सूची में से अपने ज़िले का नाम चुनें (जैसे- वाराणसी, मेरठ, गोरखपुर)।
  • तहसील (Tehsil): अपनी तहसील का चयन करें।
  • ग्राम (Village): अपने गाँव का नाम चुनें (आप गाँव के नाम का पहला अक्षर टाइप करके भी उसे जल्दी खोज सकते हैं)।

नोट: यदि आपके गाँव का नाम लिस्ट में नहीं आ रहा है, तो इसका मतलब है कि या तो आपके गाँव का ड्रोन सर्वे अभी नहीं हुआ है, या डेटा अभी पोर्टल पर अपलोड नहीं किया गया है।

Step 4: घरौनी खोजने का विकल्प चुनें

अब आपके सामने घरौनी खोजने के लिए कुछ विकल्प (Options) आएँगे:

  1. खाता संख्या (Gharauni Account Number): यदि आपको अपना घरौनी खाता नंबर पता है।
  2. गाटा संख्या (Gata/Plot Number): आबादी के गाटे के आधार पर।
  3. खातेदार के नाम द्वारा (By Name): यदि आपको नंबर नहीं पता, तो आप घर के मालिक (मुखिया) के नाम के शुरुआती अक्षर टाइप करके सर्च कर सकते हैं।

Step 5: घरौनी देखें और डाउनलोड करें (View and Download)

  • सही नाम या नंबर मिलने पर उसे सेलेक्ट करें और "उद्धरण देखें" (View Quote) बटन पर क्लिक करें।
  • स्क्रीन पर एक Captcha (सिक्योरिटी कोड) आएगा, उसे भरें और 'Continue' पर क्लिक करें।
  • आपकी स्क्रीन पर आपकी घरौनी (Property Card) खुल जाएगी।
  • इसमें आपके घर का क्षेत्रफल (वर्ग मीटर में), चौहद्दी (East, West, North, South में कौन है), और मालिकाना हक़ का पूरा विवरण लिखा होगा। आप इसे डाउनलोड (PDF) कर सकते हैं या प्रिंट (Print) कर सकते हैं।

6. यदि घरौनी में नाम या क्षेत्रफल गलत दर्ज हो जाए तो क्या करें?

चूँकि घरौनी बनाने का काम बड़े स्तर पर और जल्दी में हो रहा है, इसलिए कई बार मानवीय त्रुटि (Human Error) के कारण किसी व्यक्ति के घर का कुछ हिस्सा पड़ोसी की घरौनी में दर्ज हो जाता है, या घर के मुखिया के नाम में स्पेलिंग मिस्टेक (Spelling Mistake) हो जाती है।

सुधार कैसे कराएं (How to Correct Mistakes):

  1. आपत्ति अवधि (Objection Period): जब लेखपाल गाँव में घरौनी का कच्चा ड्राफ्ट (Draft) पढ़ कर सुनाता है, तब आपको 15 से 30 दिन का समय मिलता है। इस दौरान आप लेखपाल या तहसीलदार (Tehsildar) को लिखित प्रार्थना पत्र देकर अपनी घरौनी में फ्री में सुधार करवा सकते हैं।
  2. अंतिम प्रकाशन के बाद (After Final Publication): यदि फाइनल घरौनी छप चुकी है और तब आपको गलती का पता चलता है, तो आपको उप-ज़िलाधिकारी (SDM / Sub-Divisional Magistrate) की कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र (Application) देना होगा। SDM राजस्व निरीक्षक (Kanoongo) से मौके की जाँच करवाकर सुधार का आदेश (Correction Order) जारी कर सकते हैं।

7. उत्तर प्रदेश में स्वामित्व योजना (Swamitva Yojana) की वर्तमान स्थिति

उत्तर प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य है जिसने 'पीएम स्वामित्व योजना' को सबसे तेज़ी से और सबसे बड़े पैमाने पर लागू किया है।

  • राज्य के लगभग 90,000 से अधिक गाँवों में ड्रोन सर्वे का काम पूरा किया जा चुका है।
  • करोड़ों ग्रामीणों को उनके प्रॉपर्टी कार्ड (घरौनी) भौतिक रूप (Physical Copy) में सौंपे जा चुके हैं।
  • राज्य सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर ग्रामीण परिवार के पास उनकी अपनी घरौनी का पक्का डिजिटल कागज़ उपलब्ध हो, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) को मुख्यधारा की बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. क्या घरौनी (Gharauni) बनवाने के लिए कोई फीस (Fee) लगती है? Ans: जी नहीं। सरकार द्वारा घरौनी (प्रॉपर्टी कार्ड) बनाने और उसका वितरण करने की पूरी प्रक्रिया नागरिकों के लिए पूरी तरह से निःशुल्क (Free) है। ड्रोन सर्वे से लेकर घरौनी प्रिंट करने तक का सारा खर्च सरकार उठाती है।

Q2. यदि घर दादा या पिता के नाम पर है और वे जीवित नहीं हैं, तो घरौनी किसके नाम पर बनेगी? Ans: यदि मूल मालिक की मृत्यु हो चुकी है, तो सर्वे के दौरान परिवार के सभी विधिक उत्तराधिकारियों (Legal Heirs) यानी बेटों, बेटियों और पत्नी के नाम संयुक्त रूप से (Jointly) घरौनी में दर्ज किए जाते हैं।

Q3. क्या मैं अपनी घरौनी (Property Card) को ऑनलाइन वेरीफाई (Verify) कर सकता हूँ? Ans: हाँ। UP Bhulekh (upbhulekh.gov.in) पोर्टल पर जाकर आप अपनी घरौनी का नंबर डालकर उसे ऑनलाइन वेरीफाई कर सकते हैं। डिजिटल घरौनी पर एक विशेष बारकोड/क्यूआर कोड (QR Code) भी होता है जिससे उसकी प्रामाणिकता चेक की जा सकती है।

Q4. क्या घरौनी बनने के बाद मुझे अपने घर का हाउस टैक्स (House Tax) देना पड़ेगा? Ans: ग्राम पंचायत स्तर पर हाउस टैक्स या प्रॉपर्टी टैक्स का नियम पहले से ही लागू होता है (जो बहुत मामूली होता है)। घरौनी का मुख्य उद्देश्य आपको मालिकाना हक़ देना और लोन की सुविधा दिलाना है, न कि भारी टैक्स थोपना।

Q5. अगर गाँव के दबंग ने मेरी ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है, तो क्या सर्वे में घरौनी उसके नाम बन जाएगी? Ans: ड्रोन सर्वे के बाद लेखपाल द्वारा मौके का सत्यापन (Ground Verification) किया जाता है। यदि ज़मीन पर कब्ज़े को लेकर विवाद है, तो जब तक एसडीएम (SDM) या कोर्ट उस विवाद को सुलझा नहीं देता, तब तक उस ज़मीन की घरौनी विवादित (Disputed) श्रेणी में रखी जाती है।


[!WARNING] Disclaimer (अस्वीकरण): यह लेख केवल आम नागरिकों की सूचना, डिजिटल साक्षरता और शैक्षणिक जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। JanSarkari.com किसी भी प्रकार से उत्तर प्रदेश सरकार, राजस्व परिषद (Board of Revenue) या पंचायती राज मंत्रालय की 'स्वामित्व योजना' से संबद्ध (Affiliated) नहीं है। हमने यह जानकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइटों (upbhulekh.gov.in / swamitva.nic.in) और सार्वजनिक डोमेन से प्राप्त की है। ऑनलाइन डाउनलोड की गई घरौनी केवल सूचना के लिए है; बैंक लोन या कानूनी मामलों (Court Matters) में उपयोग के लिए आपको सक्षम अधिकारी (तहसीलदार) द्वारा प्रमाणित (Certified) कॉपी की आवश्यकता हो सकती है। घरौनी वितरण, सर्वे और नियमों में सरकार द्वारा बदलाव किए जा सकते हैं। किसी भी विधिक कार्यवाही से पहले कृपया अपने स्थानीय लेखपाल या तहसील कार्यालय से संपर्क करें। किसी भी तकनीकी त्रुटि या नुकसान के लिए यह वेबसाइट उत्तरदायी नहीं होगी।

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