उत्तर प्रदेश में कृषि और किसानी को बेहतर बनाने के लिए सरकार द्वारा समय-समय पर कई योजनाएं और कानूनी प्रक्रियाएं लागू की जाती हैं। इन्हीं में से एक सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रक्रिया है— चकबंदी (Chakbandi / Consolidation of Holdings)।
जब भी किसी गाँव में चकबंदी की घोषणा होती है, तो किसानों के मन में कई तरह के सवाल और डर पैदा हो जाते हैं कि "क्या उनकी पुश्तैनी ज़मीन छिन जाएगी?", "नया खेत (चक) कहाँ मिलेगा?", या "क्या चकबंदी में रिश्वत चलती है?"। राज्य सरकार ने इन सभी समस्याओं का समाधान करते हुए और प्रक्रिया में पारदर्शिता (Transparency) लाने के लिए UP Chakbandi Portal (उत्तर प्रदेश चकबंदी विभाग पोर्टल) की शुरुआत की है।
इस विस्तृत लेख में हम जानेंगे कि चकबंदी क्या होती है, इसके नियम क्या हैं, चकबंदी पोर्टल (bor.up.nic.in/chakbandi) का उपयोग कैसे करें, चकबंदी के दौरान इस्तेमाल होने वाले प्रपत्र (जैसे CH-41, CH-45) क्या हैं, और घर बैठे अपने गाँव की चकबंदी की स्थिति (Status) कैसे चेक करें।
'चकबंदी' दो शब्दों से मिलकर बना है— चक (खेत का टुकड़ा) + बंदी (एक जगह बांधना या इकट्ठा करना)।
सरल भाषा में समझें तो, जब किसी किसान के पास 4-5 अलग-अलग छोटे-छोटे खेत होते हैं जो पूरे गाँव में अलग-अलग जगहों पर बिखरे होते हैं, तो सरकार उन सभी छोटे खेतों को नापकर, उनकी कुल कीमत और क्षेत्रफल के बराबर उस किसान को किसी एक ही जगह पर एक बड़ा खेत (चक) दे देती है। इसी पूरी कानूनी प्रक्रिया को चकबंदी (Consolidation) कहा जाता है।
चकबंदी की आवश्यकता क्यों पड़ी? पीढ़ी दर पीढ़ी ज़मीन के बंटवारे (Partition) के कारण किसानों के खेत बहुत छोटे हो जाते हैं। अलग-अलग जगह छोटे खेत होने के कारण किसान न तो सही से सिंचाई (Irrigation) कर पाता है, न ट्रैक्टर से जुताई कर पाता है, और न ही मेड़-बंदी (Fencing) कर पाता है। इन बिखरे हुए खेतों को एक जगह इकट्ठा करके खेती को मुनाफे का सौदा बनाने के लिए चकबंदी की जाती है।
उत्तर प्रदेश में चकबंदी का पूरा कार्य "उत्तर प्रदेश जोत चकबन्दी अधिनियम, 1953 (UP Consolidation of Holdings Act, 1953)" के तहत किया जाता है।
उत्तर प्रदेश के राजस्व परिषद (Board of Revenue) ने चकबंदी की लंबी, उबाऊ और भ्रष्टाचार-युक्त कागज़ी प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के लिए चकबंदी पोर्टल (bor.up.nic.in/chakbandi) लॉन्च किया है।
पहले किसानों को यह भी पता नहीं चल पाता था कि उनके गाँव में चकबंदी किस स्तर (Level) पर चल रही है, या उनके नए 'चक' का नक्शा कैसा है। लेकिन अब इस पोर्टल के माध्यम से कोई भी किसान अपने मोबाइल पर घर बैठे चकबंदी से जुड़ी हर जानकारी प्राप्त कर सकता है।
यदि आप जानना चाहते हैं कि क्या आपके गाँव में चकबंदी चल रही है या वह किस स्टेज (Phase) पर पहुँच गई है, तो नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें:
सबसे पहले अपने कंप्यूटर या मोबाइल ब्राउज़र में राजस्व परिषद की वेबसाइट खोलें, या सीधे bor.up.nic.in/chakbandi (चकबंदी निदेशालय, उत्तर प्रदेश) पर जाएँ।
होमपेज पर आपको बहुत सारे विकल्प दिखेंगे। उनमें से 'चकबंदी ग्रामों की सूची (Status of Chakbandi Villages)' या 'प्रगति रिपोर्ट' वाले लिंक पर क्लिक करें।
चकबंदी कोई एक दिन का काम नहीं है; इसमें सालों लग जाते हैं। गाँव में चकबंदी की शुरुआत से लेकर अंत तक कई कानूनी प्रक्रियाएं (Legal Sections) लागू होती हैं:
जब राज्य सरकार को लगता है कि किसी गाँव में चकबंदी होनी चाहिए, तो सरकार एक राजपत्र (Gazette) में अधिसूचना (Notification) जारी करती है कि अमुक गाँव में चकबंदी शुरू होने वाली है। धारा 4 के लागू होते ही गाँव के सभी राजस्व मुकदमे रुक जाते हैं और ज़मीन का नियंत्रण चकबंदी विभाग के पास चला जाता है।
चकबंदी लेखपाल गाँव में आता है और हर खेत की नाप-जोख (Survey) करता है। वह देखता है कि किस खेत में सिंचाई की क्या सुविधा है, पेड़ कितने हैं, और ज़मीन की मिट्टी कैसी है। इसी आधार पर खेत की कीमत (Exchange Ratio/ Valuation) तय की जाती है।
पड़ताल के बाद एक लिस्ट (आकार पत्र-5) जारी की जाती है। यदि किसी किसान को लगता है कि उसके खेत की कीमत कम लगाई गई है, या रिकॉर्ड में उसका नाम गलत है, तो वह धारा 9 के तहत सहायक चकबंदी अधिकारी (ACO) के समक्ष अपनी आपत्ति (Objection) दर्ज करा सकता है।
आपत्तियों के निपटारे के बाद, विभाग यह तय करता है कि गाँव में कहाँ नई सड़कें बनेंगी, कहाँ पंचायत घर बनेगा, और कहाँ खेल का मैदान या चारागाह होगा। इसे 'चकबंदी योजना' कहते हैं।
योजना फाइनल होने के बाद, किसानों को उनके पुराने बिखरे हुए खेतों के बदले एक नया बड़ा खेत (चक) आवंटित किया जाता है। इसे CH-23 (आकार पत्र-23) में दर्ज किया जाता है। किसान को उसके नए चक पर कब्ज़ा (Possession) दिला दिया जाता है।
जब गाँव में सभी आपत्तियां और मुकदमे खत्म हो जाते हैं, और सभी किसानों को उनका नया चक मिल जाता है, तो सरकार धारा 52 के तहत अधिसूचना जारी करती है कि "इस गाँव में चकबंदी का काम पूरा हो गया है।" इसके बाद नया नक्शा और नई खतौनी (CH-45) वापस राजस्व विभाग (तहसील) को सौंप दी जाती है।
चकबंदी प्रक्रिया के दौरान चकबंदी विभाग (Chakbandi Vibhag UP) कई प्रकार के कागज़ (Forms) तैयार करता है, जिन्हें 'CH' (Consolidation of Holdings) फॉर्म कहा जाता है। किसानों को इनके बारे में जानकारी होना बहुत ज़रूरी है:
| फॉर्म का नाम | विवरण (Description) |
|---|---|
| CH-2 (आकार पत्र-2) | खसरा (Khasra) - इसमें ज़मीन की वर्तमान स्थिति, फसल और सिंचाई के साधन लिखे होते हैं। |
| CH-5 (आकार पत्र-5) | इसमें किसान के सभी खेतों का विवरण, उनकी कीमत (Valuation) और पेड़ों का ब्यौरा होता है। |
| CH-11 (आकार पत्र-11) | यह पुराने खेतों की लिस्ट है, जिसे किसान को दिखाया जाता है। |
| CH-23 (आकार पत्र-23) | (सबसे महत्वपूर्ण) यह वह फॉर्म है जिसमें किसान को आवंटित किए गए "नए चक (New Chak)" का पूरा विवरण, नया खसरा नंबर और नक्शा (Map) होता है। |
| CH-41 (आकार पत्र-41) | यह चकबंदी के दौरान बनाई गई नई खतौनी (New Khatauni) होती है। |
| CH-45 (आकार पत्र-45) | चकबंदी पूरी होने (धारा 52) के बाद जो अंतिम नई खतौनी (Final Record of Rights) बनती है, उसे CH-45 कहते हैं। यही खतौनी आगे चलकर तहसील में मान्य होती है। |
हालांकि चकबंदी एक बहुत ही अच्छी योजना है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसके लागू होने में कुछ चुनौतियाँ भी आती हैं:
उत्तर प्रदेश सरकार ने चकबंदी प्रक्रिया में हो रहे भ्रष्टाचार को खत्म करने और इसमें तेजी लाने के लिए अब 'डिजिटल चकबंदी' की शुरुआत की है।
Q1. क्या चकबंदी रुकवाई जा सकती है? (Can Chakbandi be stopped?) Ans: यदि किसी गाँव के 75% से अधिक किसान चकबंदी नहीं चाहते हैं, या गाँव की ज़मीन का 75% हिस्सा चकबंदी के खिलाफ है, तो गाँव वाले चकबंदी आयुक्त (Consolidation Commissioner) या शासन को प्रार्थना पत्र देकर चकबंदी निरस्त (Cancel) करवा सकते हैं।
Q2. चकबंदी में 'उड़न चक' (Udan Chak) क्या होता है? Ans: जब किसान के खेत किसी एक जगह (दिशा) में हों, लेकिन चकबंदी विभाग उसे गाँव के बिल्कुल दूसरी दिशा में ले जाकर कोई चक (खेत) दे दे, जहाँ उसका पहले से कोई भी खेत या ज़मीन न हो, तो उसे 'उड़न चक' कहा जाता है। यह गैरकानूनी है, जब तक कि किसान खुद इसके लिए सहमति न दे।
Q3. चकबंदी के दौरान ज़मीन की खरीद-बिक्री (Registry) कैसे करें? Ans: जब गाँव में धारा 4 लागू हो जाती है (चकबंदी शुरू होती है), तो कोई भी किसान अपनी ज़मीन नहीं बेच सकता। ज़मीन बेचने (Registry) के लिए उसे चकबंदी बंदोबस्त अधिकारी (SOC - Settlement Officer Consolidation) से विशेष अनुमति (Permission) लेनी पड़ती है।
Q4. चकबंदी अधिकारी (CO) के फैसले के खिलाफ अपील कहाँ करें? Ans: यदि आप चकबंदी अधिकारी (CO - Consolidation Officer) के चक आवंटन से असंतुष्ट हैं, तो आप 21 दिनों के भीतर बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी (SOC) के न्यायालय में अपील कर सकते हैं। वहां से भी असंतुष्ट होने पर उप संचालक चकबंदी (DDC - Deputy Director of Consolidation) के यहाँ निगरानी (Revision) दायर की जा सकती है। DDC का फैसला चकबंदी विभाग में अंतिम होता है।
Q5. चकबंदी पूरी होने के बाद नई खतौनी कब मिलती है? Ans: जब गाँव में धारा 52 (चकबंदी की समाप्ति) का प्रकाशन हो जाता है, तो विभाग द्वारा CH-45 (आकार पत्र-45) तैयार किया जाता है। यही गाँव की नई खतौनी होती है, जिसे तहसील में भेज दिया जाता है। इसके बाद किसान UP Bhulekh पोर्टल पर अपनी नई खतौनी देख सकते हैं।
[!WARNING] Disclaimer (अस्वीकरण): यह लेख केवल किसानों और आम नागरिकों की सूचना, विधिक जागरूकता और शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है। JanSarkari.com किसी भी प्रकार से उत्तर प्रदेश सरकार, राजस्व परिषद (Board of Revenue) या चकबंदी विभाग (Chakbandi Vibhag UP) से संबद्ध (Affiliated) नहीं है। चकबंदी एक जटिल कानूनी प्रक्रिया है जिसके नियम और धाराएं समय-समय पर शासन द्वारा संशोधित की जा सकती हैं। हमने यह जानकारी विभाग की वेबसाइट (bor.up.nic.in/chakbandi) और सार्वजनिक डोमेन से प्राप्त की है। अपनी ज़मीन, चक के आवंटन, या कोर्ट के मुकदमों के संबंध में किसी भी प्रकार का कानूनी निर्णय लेने से पहले कृपया अपने स्थानीय चकबंदी लेखपाल, चकबंदी अधिकारी (CO) या किसी विशेषज्ञ राजस्व अधिवक्ता (Revenue Lawyer) से सलाह अवश्य लें। किसी भी त्रुटि या विधिक नुकसान के लिए यह वेबसाइट उत्तरदायी नहीं होगी।
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