यूरिया/DAP छोड़कर जैविक खेती (Organic Farming) करने वाले किसानों को 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सरकारी सहायता।
यहाँ परम्परागत कृषि विकास योजना (Paramparagat Krishi Vikas Yojana - PKVY) के बारे में अत्यंत विस्तृत और सम्पूर्ण जानकारी (3000+ शब्द) दी गई है:
अगर आप एक किसान हैं और केमिकल वाली खेती छोड़ना चाहते हैं, तो यह योजना आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि इसमें शुरुआत के 3 साल तक सरकार आपका पूरा खर्च (खाद-बीज का) खुद उठाती है!
सरकार यह योजना सिर्फ सब्सिडी बांटने के लिए नहीं चला रही है, बल्कि इसके 4 बड़े लक्ष्य हैं:
यह इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण नियम है। आप अकेले इस योजना का लाभ नहीं ले सकते। सरकार चाहती है कि पूरा का पूरा गांव ही जैविक बन जाए। इसलिए इसे क्लस्टर (समूह) के रूप में लागू किया जाता है:
जब किसान केमिकल छोड़ता है, तो शुरुआत के 2-3 साल उसकी पैदावार (Yield) थोड़ी कम हो जाती है। इसी नुकसान की भरपाई करने के लिए सरकार बहुत भारी फंड देती है।
हर क्लस्टर को (यानी प्रति हेक्टेयर ज़मीन के लिए) 3 साल के लिए 50,000 रुपये की सहायता दी जाती है। इस 50,000 रुपये को तीन हिस्सों में बांटा जाता है:
| खर्च का प्रकार (Type of Expense) | राशि (3 साल के लिए) | विवरण (Description) |
|---|---|---|
| 1. किसानों को डायरेक्ट पैसा (DBT) | ₹ 31,000 / हेक्टेयर | यह पैसा सीधे किसान के बैंक खाते में आता है (पहले साल 12 हज़ार, दूसरे साल 10 हज़ार, तीसरे साल 9 हज़ार)। इस पैसे से किसान जैविक बीज, वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद), जीवामृत, और नीम का तेल (Neem Oil) खरीदता है। |
| 2. मार्केटिंग और ब्रांडिंग (Marketing) | ₹ 8,800 / हेक्टेयर | यह पैसा किसान को नहीं मिलता, बल्कि कृषि विभाग द्वारा क्लस्टर की फसल को पैक करने, उस पर ब्रांड का लेबल लगाने, और मंडियों तक पहुँचाने (Transport) में खर्च किया जाता है। |
| 3. ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन (PGS & Training) | ₹ 10,200 / हेक्टेयर | कृषि वैज्ञानिकों द्वारा गांव में आकर किसानों को ट्रेनिंग देना, मिट्टी की जाँच करना, और दिल्ली से 'जैविक प्रमाण-पत्र' (PGS Certificate) बनवाकर लाने का पूरा खर्च सरकार इसी फंड से उठाती है। |
अगर कोई किसान प्राइवेट एजेंसी से अपनी फसल का ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट बनवाए, तो 40-50 हज़ार रुपये लग जाते हैं। लेकिन PKVY में सरकार 'PGS-India' के तहत इसे बिल्कुल मुफ़्त (Free) करती है।
जब किसान का अनाज या सब्ज़ी जैविक (Organic) हो जाती है, तो उसे गांव की आम मंडी में बेचने से कोई फायदा नहीं है (वहाँ तो नॉर्मल दाम ही मिलेंगे)। इसीलिए कृषि मंत्रालय ने www.jaivikkheti.in नाम से एक ई-कॉमर्स पोर्टल बनाया है (Amazon/Flipkart की तरह)।
इस योजना का फायदा लेने के लिए आपको किसी ऑनलाइन साइबर कैफे (Online Cafe) पर जाने की ज़रूरत नहीं है। इसकी प्रक्रिया ज़मीनी (Ground level) है:
प्र. मेरे पास गाय नहीं है, क्या मैं जैविक खेती (PKVY) कर सकता हूँ?
उ. जैविक खेती के लिए गाय का गोबर और गौमूत्र सबसे महत्वपूर्ण होता है (खासकर जीवामृत बनाने के लिए)। अगर आपके पास गाय नहीं है, तो आप अपने समूह (Cluster) के दूसरे किसानों से गोबर-गौमूत्र खरीद सकते हैं। इस खरीददारी का पैसा आपको सरकार की ₹31,000 वाली सब्सिडी से मिल जाएगा।
प्र. क्या यूरिया/DAP छोड़ने से मेरी फसल की पैदावार (Yield) कम नहीं हो जाएगी?
उ. शुरुआत के 2 सालों में पैदावार 10% से 15% तक कम हो सकती है, क्योंकि मिट्टी केमिकल की आदी हो चुकी है। लेकिन तीसरे साल से मिट्टी अपनी पुरानी ताक़त पकड़ लेती है और पैदावार पहले से भी ज़्यादा होने लगती है। इसी 2 साल के नुकसान से बचाने के लिए सरकार 50,000 रुपये की मदद दे रही है।
प्र. अगर हमारे क्लस्टर (50 किसानों) में से 2 किसानों ने छुपकर रात में खेत में यूरिया डाल दिया, तो क्या होगा?
उ. PGS सर्टिफिकेशन में यही सबसे बड़ा खतरा है! अगर जांच (Soil/Plant testing) में यूरिया पकड़ा गया, तो सिर्फ उन 2 किसानों का नहीं, बल्कि पूरे के पूरे क्लस्टर (50 किसानों) का सर्टिफिकेट रद्द (Cancel) हो जाएगा। इसीलिए इसे "Participatory (पारस्परिक)" कहते हैं—सबको एक-दूसरे पर नज़र रखनी होती है।
प्र. क्या मैं फल (Orchards) या सब्ज़ियों (Vegetables) के लिए यह सब्सिडी ले सकता हूँ?
उ. हाँ, बिल्कुल! आप गेहूं-धान से लेकर सेब, आम, चाय, कॉफी, और सब्ज़ियों तक—किसी भी फसल के लिए यह सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं।
परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) भारत की कृषि में एक क्रांति है। यह योजना किसानों को बाज़ार के महंगे केमिकल फर्टिलाइज़र कंपनियों के चंगुल से आज़ाद कराती है।
जब आप खुद घर पर गाय के गोबर से खाद बनाएंगे, तो खेती की लागत (Cost of Cultivation) शून्य (Zero) हो जाएगी। लागत ज़ीरो, पैदावार अच्छी, और बाज़ार में दाम दोगुना! अगर आपके गांव के किसान एकजुट हैं, तो आज ही कृषि विभाग (Agriculture Department) से संपर्क करें और अपने गांव को 'जैविक गांव (Organic Village)' बनाएं।
गांव के 20 से 50 किसानों को मिलकर कम से कम 50 एकड़ (20 हेक्टेयर) ज़मीन का एक "क्लस्टर" (समूह) बनाना होगा।
अपने ज़िले के कृषि विभाग (Agriculture Office) या कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में जाकर क्लस्टर का रजिस्ट्रेशन कराएं।
सरकार द्वारा 3 साल तक जैविक खाद (केंचुआ खाद, गौमूत्र आदि) खरीदने के लिए 31,000 रुपये सीधे खाते में दिए जाएंगे।
खेती पूरी होने पर सरकार मुफ़्त में आपकी फसल को "जैविक (Organic)" का प्रमाण-पत्र (PGS Certificate) देगी, जिससे फसल बाज़ार में दोगुनी कीमत पर बिकेगी।
योजना के तहत 3 साल के लिए प्रति हेक्टेयर ₹50,000 मंजूर होते हैं। इसमें से ₹31,000 किसान के बैंक खाते (DBT) में खाद-बीज खरीदने के लिए नकद आते हैं। बाकी ₹19,000 किसान की ट्रेनिंग, पैकिंग, और मुफ़्त सर्टिफिकेशन पर खर्च किए जाते हैं।
नहीं। PKVY योजना "क्लस्टर आधारित (Cluster-based)" है। आपको अपने गांव या आस-पास के कम से कम 20 किसानों को साथ मिलाकर एक समूह (Cluster) बनाना होगा, तभी सरकार फंड जारी करेगी।
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नोट: किसी भी सरकारी सेवा के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें।
JanSarkari.com आपको सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करता है। यदि आपको परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY) से जुड़ी कोई समस्या है, तो आप संबंधित विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।