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राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF): रसायनमुक्त खेती, ₹2,481 करोड़ बजट और अनुदान: सम्पूर्ण जानकारी और ऑनलाइन आवेदन

केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृत ₹2,481 करोड़ का राष्ट्रीय मिशन, जिसके तहत 1 करोड़ किसानों को रसायनमुक्त देसी गाय आधारित प्राकृतिक खेती, 10,000 बायो-इनपुट सेंटर और प्रति हेक्टेयर सरकारी अनुदान।

यहाँ राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (National Mission on Natural Farming - NMNF: रसायनमुक्त खेती, ₹2,481 करोड़ बजट और अनुदान) के बारे में अत्यंत विस्तृत, प्रामाणिक और सम्पूर्ण जानकारी (4500+ शब्द) दी गई है:

🌾 राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF): मुख्य तथ्य (Quick Highlights)

केंद्र सरकार द्वारा देश की मिट्टी को बंजर होने से बचाने और किसानों की खेती लागत को शून्य करने के लिए शुरू किया गया भारत का सबसे बड़ा रसायनमुक्त कृषि अभियान।

  • कुल वित्तीय परिव्यय: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ₹2,481 करोड़ की आधिकारिक मंजूरी।
  • लक्षित किसान व क्षेत्रफल: देश के 1 करोड़ किसानों को जोड़ना और 7.5 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को प्राकृतिक खेती में परिवर्तित करना।
  • क्लस्टर संरचना: ग्राम पंचायतों में 50-50 हेक्टेयर के 15,000 प्राकृतिक खेती क्लस्टरों का गठन।
  • 10,000 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRCs): गांव-गांव में जीवामृत और नीमास्त्र उपलब्ध कराने वाले केंद्रों की स्थापना और ₹1 लाख तक सरकारी मदद।
  • शून्य लागत सिद्धांत: बाजार से कोई यूरिया, डीएपी या कीटनाशक नहीं खरीदना; केवल देसी गाय के गोबर-गोमूत्र और वानस्पतिक अर्क का उपयोग।
  • प्रमाणन व प्रीमियम मूल्य: किसानों को सरल डिजिटल प्रमाणन और Jaivik Kheti पोर्टल के जरिए 30% से 50% अधिक लाभकारी मूल्य की गारंटी।

📌 विषय सूची (Table of Contents)

  1. प्रस्तावना: रासायनिक खेती का संकट, घटती उर्वरता और बीमारियों का चक्रव्यूह
  2. राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) क्या है? (संक्षिप्त परिचय व कानूनी ढांचा)
  3. योजना का मुख्य विज़न और 'भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (BPKP)'
  4. प्राकृतिक खेती के 4 मूलभूत वैज्ञानिक स्तंभ (The Four Pillars)
  5. बजटीय आवंटन एवं किसानों को मिलने वाला वित्तीय अनुदान (Financial Support)
  6. 10,000 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRCs): ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का अवसर
  7. प्राकृतिक खेती बनाम जैविक खेती बनाम रासायनिक खेती (विस्तृत तुलनात्मक चार्ट)
  8. पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria) - कौन से किसान जुड़ सकते हैं?
  9. आवश्यक दस्तावेज़ों की सूची (Required Documents Checklist)
  10. स्टेप-बाय-स्टेप ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और क्लस्टर चयन प्रक्रिया
  11. घर पर जीवामृत, बीजामृत और नीमास्त्र बनाने की प्रामाणिक विधियां
  12. डिजिटल प्रमाणन (Certification) और उपज की लाभकारी बिक्री
  13. पानी की 50% बचत और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ सुरक्षा कवच
  14. अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Detailed FAQs)
  15. आधिकारिक कृषि पोर्टल, संपर्क सूत्र और किसान हेल्पलाइन
  16. वैधानिक डिस्क्लेमर (Statutory Disclaimer)

1. प्रस्तावना: रासायनिक खेती का संकट, घटती उर्वरता और बीमारियों का चक्रव्यूह

1960 के दशक की 'हरित क्रांति' (Green Revolution) ने निस्संदेह भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया, लेकिन पिछले छह दशकों में रासायनिक खादों (यूरिया, डीएपी, पोटाश) और जहरीले कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग ने हमारी धरती को गंभीर रूप से बीमार कर दिया है।

आज देश का किसान गंभीर संकटों से जूझ रहा है:

  • खेती की भारी लागत: हर साल खाद, कीटनाशक और संकर बीजों की कीमतें बढ़ती जा रही हैं, जिससे किसान कर्ज के जाल में फंस रहे हैं।
  • मिट्टी की जैविक मृत्यु (Soil Degradation): मिट्टी में मौजूद मित्र कीट (केंचुए, लाभदायक जीवाणु) रसायनों के कारण खत्म हो चुके हैं। मिट्टी की जल सोखने की क्षमता घट गई है।
  • स्वास्थ्य संकट: खाद्यान्न और सब्जियों में कीटनाशकों के अवशेषों के कारण कैंसर, किडनी फेलियर, मधुमेह और आनुवंशिक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।

इस जानलेवा चक्रव्यूह से देश के किसानों और नागरिकों को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने "राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF)" को ₹2,481 करोड़ के विशाल बजट के साथ एक स्वतंत्र राष्ट्रीय फ्लैगशिप योजना के रूप में लागू किया है।


2. राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) क्या है? (संक्षिप्त परिचय व कानूनी ढांचा)

NMNF (National Mission on Natural Farming) भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित एक ऐतिहासिक केंद्रीय क्षेत्रक मिशन है।

  • मिशन का नाम: राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (National Mission on Natural Farming - NMNF)
  • प्रशासनिक मंत्रालय: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (Ministry of Agriculture and Farmers Welfare), भारत सरकार।
  • तकनीकी भागीदार: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राष्ट्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र (NCONF)।
  • स्वीकृत बजट: ₹2,481 करोड़।
  • कार्यक्षेत्र: देश के सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश (विशेष रूप से गंगा नदी के दोनों किनारों के 5-5 किमी के गलियारे और जनजातीय क्षेत्र)।

यह मिशन पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक सूक्ष्मजीव विज्ञान का वैज्ञानिक समन्वय है, जिसका मुख्य सिद्धांत है—"प्रकृति के विरुद्ध नहीं, प्रकृति के साथ मिलकर खेती करना।"


3. योजना का मुख्य विज़न और 'भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति (BPKP)'

NMNF योजना को पूर्ववर्ती 'परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY)' के उप-घटक 'भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति' (BPKP) के सफल अनुभवों को बड़े पैमाने पर पूरे देश में लागू करने के लिए तैयार किया गया है।

मिशन का मुख्य विज़न है:

  1. शून्य बाहरी इनपुट (Zero External Inputs): किसान को बाजार से ₹1 का भी रासायनिक खाद या कीटनाशक न खरीदना पड़े।
  2. देसी गाय का संरक्षण और संवर्धन: भारतीय नस्ल की एक देसी गाय (जैसे गीर, साहीवाल, थारपारकर, लाल सिंधी) के गोबर और गोमूत्र से एक किसान 30 एकड़ भूमि पर सफलतापूर्वक प्राकृतिक खेती कर सकता है।
  3. मिट्टी के कार्बन (Soil Organic Carbon) में वृद्धि: मिट्टी में ह्यूमस और सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाकर उसकी उपजाऊ शक्ति को पुनर्जीवित करना।

4. प्राकृतिक खेती के 4 मूलभूत वैज्ञानिक स्तंभ (The Four Pillars)

पद्मश्री सुभाष पालेकर द्वारा प्रतिपादित और वैज्ञानिकों द्वारा सत्यापित प्राकृतिक खेती के 4 अनिवार्य अंग हैं:

1. बीजामृत (Beejamrit) - जैविक बीज शोधन

देसी गाय के गोबर, गोमूत्र, चूना और मेड़ की मिट्टी से बना प्राकृतिक घोल। बुवाई से पहले बीजों या पौधों की जड़ों को इसमें डुबोया जाता है, जिससे फफूंद, बीज जनित रोग और दीमक का खतरा 100% समाप्त हो जाता है।

2. जीवामृत (Jeevamrit) - सूक्ष्मजीवों का महासागर

देसी गाय के 10 किलो गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, 2 किलो गुड़, 2 किलो बेसन और मुट्ठी भर उपजाऊ मिट्टी से 200 लीटर पानी में 48 घंटे में तैयार घोल। इसमें 1 ग्राम में अरबों मित्र जीवाणु होते हैं जो जमीन में दबे पड़े पोषक तत्वों (नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश) को घोलकर पौधों की जड़ों तक पहुँचाते हैं।

3. आच्छादन / मल्चिंग (Mulching) - मृदा आवरण

खेत की जमीन को कभी नंगा नहीं छोड़ा जाता। फसल के अवशेषों (पुआल, सूखी पत्तियां, डंठल) से जमीन को ढक दिया जाता है। इससे धूप सीधे मिट्टी पर नहीं पड़ती, नमी बनी रहती है, खरपतवार नहीं उगते और नीचे लाखों केंचुए स्वतः सक्रिय हो जाते हैं।

4. वाफसा (Whaphasa) - सूक्ष्म वायु एवं नमी संतुलन

पौधे की जड़ें कभी पानी नहीं पीतीं, वे पानी की वाष्प (Water Vapour) और हवा लेती हैं। वाफसा की स्थिति में खेत को बाढ़ की तरह पानी देने की जरूरत नहीं होती। इससे सिंचाई के पानी और बिजली की **50% से अधिक बचत** होती है।


5. बजटीय आवंटन एवं किसानों को मिलने वाला वित्तीय अनुदान (Financial Support)

NMNF योजना के अंतर्गत किसानों और ग्रामीण स्तर पर दी जाने वाली वित्तीय सहायता का विवरण:

मद / घटक (Component)वित्तीय सहायता / अनुदान दरउद्देश्य एवं विवरण
किसान प्रोत्साहन अनुदानप्रति हेक्टेयर ₹4,000 से ₹7,500 तक (3 वर्षों में)खेत की तैयारी, ड्रम खरीद, देसी गाय संवर्धन और इनपुट निर्माण हेतु सीधे DBT।
बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC)₹1,00,000 प्रति केंद्र एकमुश्त अनुदानगांव में जीवामृत/नीमास्त्र बनाने हेतु टैंक, मोटर और ड्रम लगाने वाले उद्यमी को।
क्लस्टर निर्माण व मास्टर ट्रेनर100% सरकारी खर्च पर निःशुल्क50 हेक्टेयर के क्लस्टर में 'किसान मित्र' (Community Resource Person - CRP) की तैनाती।
डिजिटल प्रमाणन (Certification)100% फ्री (शून्य शुल्क)PGS-India और NMNF पोर्टल द्वारा डिजिटल क्यूआर-कोडेड प्राकृतिक खेती प्रमाण पत्र।

6. 10,000 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRCs): ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का अवसर

NMNF योजना का सबसे व्यावहारिक नवाचार है—बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC):

  • समस्या का समाधान: अक्सर जिन किसानों के पास देसी गाय नहीं होती, वे प्राकृतिक खेती शुरू करने में हिचकिचाते हैं।
  • केंद्र की भूमिका: गांव का कोई भी प्रगतिशील किसान या युवा अपने घर या खेत पर BRC स्थापित कर सकता है। सरकार उसे ₹1 लाख का अनुदान देती है जिससे वह 1,000 लीटर के टैंक और मोटर लगाता है।
  • रेडीमेड उपलब्धता: यह केंद्र गांव के अन्य किसानों को ताजा बना हुआ जीवामृत (₹5 से ₹10 प्रति लीटर), बीजामृत और नीमास्त्र बेचता है। इससे केंद्र संचालक को प्रति माह ₹15,000 से ₹25,000 की शुद्ध आय होती है और साथी किसानों को बना-बनाया इनपुट मिल जाता है।

7. प्राकृतिक खेती बनाम जैविक खेती बनाम रासायनिक खेती (तुलनात्मक चार्ट)

मानदंडरासायनिक खेती (Chemical Farming)जैविक खेती (Organic Farming)प्राकृतिक खेती (Natural Farming)
खेती की लागतअत्यधिक महंगी (खाद/दवाइयों पर भारी खर्च)मध्यम से उच्च (बाहरी जैविक खाद खरीदना पड़ता है)लगभग शून्य (घर के गोबर-गोमूत्र से सब कुछ तैयार)
मिट्टी की उर्वरतादिन-प्रतिदिन बंजर और कठोर होती जाती हैसंतोषजनकअत्यधिक उपजाऊ और केंचुओं से भरपूर
सिंचाई जल की खपत100% पानी (बार-बार सिंचाई की आवश्यकता)सामान्य खपत50% तक पानी की बचत (मल्चिंग और वाफसा से)
स्वास्थ्य और पर्यावरणजहरीला खाद्यान्न, गंभीर बीमारियांसुरक्षित100% विषमुक्त, अमृततुल्य पौष्टिक भोजन

8. पात्रता मानदंड (Eligibility Criteria) - कौन से किसान जुड़ सकते हैं?

योजना का लाभ लेने के लिए निम्नलिखित पात्रता शर्तें रखी गई हैं:

  • भारतीय किसान: कोई भी व्यक्ति जिसके नाम पर कृषि भूमि है (छोटा, सीमांत या बड़ा किसान) अथवा जो पट्टे पर खेती करता है।
  • इच्छा और सहमति: किसान को लिखित या डिजिटल रूप से यह सहमति देनी होगी कि वह अपने चयनित खेत में किसी भी रासायनिक उर्वरक (यूरिया/डीएपी) या सिंथेटिक कीटनाशक का प्रयोग नहीं करेगा।
  • क्लस्टर का हिस्सा बनना: किसान को अपनी ग्राम पंचायत में बने 50 हेक्टेयर के प्राकृतिक खेती क्लस्टर में शामिल होना होगा।
  • पीएम-किसान लाभार्थी: यदि किसान पहले से पीएम-किसान (PM-Kisan) योजना से जुड़ा है, तो उसका ई-केवाईसी स्वतः मान्य हो जाएगा।

9. आवश्यक दस्तावेज़ों की सूची (Required Documents Checklist)

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करते समय किसान के पास निम्नलिखित दस्तावेज होने चाहिए:

  • आधार कार्ड: किसान का आधार कार्ड (मोबाइल नंबर से लिंक होना अनिवार्य)।
  • खसरा/खतौनी (Land Records): जमीन के मालिकाना हक का प्रमाण (भूलेख नकल)।
  • बैंक खाता पासबुक: आधार-लिंक्ड और डीबीटी-सक्षम बैंक खाते का विवरण।
  • पीएम-किसान रजिस्ट्रेशन नंबर (यदि उपलब्ध हो): त्वरित सत्यापन हेतु।
  • पासपोर्ट साइज फोटो: किसान का हालिया फोटो।

10. स्टेप-बाय-स्टेप ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और क्लस्टर चयन प्रक्रिया

किसान घर बैठे मोबाइल से या नजदीकी सीएससी (CSC) सेंटर से NMNF पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं:

चरण 1: राष्ट्रीय पोर्टल पर जाएं

आधिकारिक पोर्टल naturalfarming.dac.gov.in पर जाएं और 'Farmer Registration' पर क्लिक करें।

चरण 2: आधार एवं पीएम-किसान सत्यापन

अपना आधार नंबर डालें। यदि आप पीएम-किसान के लाभार्थी हैं, तो आपकी जमीन और बैंक का विवरण पोर्टल द्वारा स्वतः स्क्रीन पर प्रदर्शित कर दिया जाएगा।

चरण 3: रकबा और क्लस्टर का चयन

आप अपनी कुल भूमि में से कितने हेक्टेयर/बीघा पर प्राकृतिक खेती करना चाहते हैं (जैसे 1 एकड़, 2 एकड़ या पूरा खेत) उसे दर्ज करें और अपने गांव का क्लस्टर चुनें।

चरण 4: मास्टर ट्रेनिंग और किट प्राप्ति

कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और आत्मा (ATMA) द्वारा आपके गांव में 4 दिन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा जिसमें जीवामृत बनाना सिखाया जाएगा।


11. घर पर जीवामृत, बीजामृत और नीमास्त्र बनाने की प्रामाणिक विधियां

🧪 जीवामृत बनाने की आसान विधि (1 एकड़ हेतु):

सामग्री: 200 लीटर पानी, 10 किग्रा देसी गाय का ताजा गोबर, 10 लीटर गोमूत्र, 2 किग्रा गुड़, 2 किग्रा बेसन (चना/उड़द), और 1 मुट्ठी खेत की मेड़ की मिट्टी।
विधि: एक प्लास्टिक ड्रम में सभी सामग्री को लकड़ी के डंडे से अच्छी तरह घोल लें। ड्रम को बोरी से ढककर छाया में रखें। सुबह-शाम 1-1 मिनट डंडे से दक्षिणावर्त (Clockwise) घुमाएं। 48 से 72 घंटे में जीवामृत तैयार हो जाता है। इसे सिंचाई के पानी के साथ बहाएं या फसलों पर 10% के घोल का छिड़काव करें।

🌿 नीमास्त्र बनाने की विधि (कीट नियंत्रण हेतु):

सामग्री: 100 लीटर पानी, 5 किग्रा नीम की पत्तियां या निंबोली, 5 लीटर गोमूत्र, और 1 किग्रा गोबर।
विधि: सभी को कूटकर पानी में मिला दें। 48 घंटे छाया में रखें और कपड़े से छान लें। यह रस चूसक कीड़ों, सुंडी और इल्ली के नियंत्रण के लिए सर्वोत्तम प्राकृतिक कीटनाशक है।


12. डिजिटल प्रमाणन (Certification) और उपज की लाभकारी बिक्री

किसानों को अक्सर यह डर रहता था कि "अगर हम प्राकृतिक खेती करेंगे तो खरीदार को कैसे पता चलेगा कि यह बिना खाद का है?"। NMNF ने इसका डिजिटल समाधान निकाला है:

  • क्यूआर कोडेड प्रमाण पत्र (QR-Coded Certificate): सत्यापन के बाद किसान के खेत और उपज का एक डिजिटल प्रमाण पत्र जारी होता है।
  • पैकेट पर क्यूआर कोड: किसान अपनी उपज के पैकेट पर यह क्यूआर कोड लगा सकता है। कोई भी ग्राहक अपने मोबाइल से स्कैन करके देख सकता है कि यह फसल किस किसान के खेत में, किस दिन और किस प्राकृतिक विधि से उगाई गई है।
  • प्रीमियम मूल्य: प्राकृतिक गेहूं, चावल, दालें और सब्जियां सामान्य बाजार भाव से 30% से 50% अधिक कीमत पर हाथों-हाथ बिकती हैं।

13. अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (Detailed FAQs)

प्र. 1. क्या प्राकृतिक खेती शुरू करने के पहले साल पैदावार (Yield) कम हो जाती है?
उ. रासायनिक खादों के कारण जमीन की आदत बिगड़ चुकी होती है। पहले साल पैदावार में 5% से 10% की हल्की गिरावट आ सकती है, लेकिन चूंकि रासायनिक खाद और कीटनाशकों का खर्च शून्य हो जाता है, इसलिए किसान का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) पहले ही साल बढ़ जाता है। दूसरे-तीसरे साल से पैदावार सामान्य से भी अधिक होने लगती है।

प्र. 2. क्या जर्सी या एचएफ (HF) गाय के गोबर से जीवामृत बन सकता है?
उ. वैज्ञानिक अनुसंधानों के अनुसार भारतीय देसी गाय (Bos Indicus) के गोबर में 1 ग्राम में 300 से 500 करोड़ सूक्ष्मजीव होते हैं, जबकि विदेशी जर्सी गाय में यह बहुत कम होते हैं। इसलिए सर्वोत्तम परिणामों के लिए देसी गाय का ही गोबर-गोमूत्र प्रयोग करने की सलाह दी जाती है।

प्र. 3. क्या छोटे किसान (1 या 2 बीघा वाले) भी इस मिशन का लाभ ले सकते हैं?
उ. हाँ! NMNF का विशेष ध्यान छोटे और सीमांत किसानों पर ही है। कम जमीन वाले किसान क्लस्टर में जुड़कर सामूहिक रूप से इस योजना का पूरा लाभ उठा सकते हैं।

प्र. 4. बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC) खोलने के लिए आवेदन कैसे करें?
उ. पोर्टल पर BRC पंजीकरण का विकल्प उपलब्ध है। इसके अलावा किसान अपने ब्लॉक के सहायक कृषि निदेशक (ADO Ag) या आत्मा (ATMA) परियोजना निदेशक से मिलकर भी BRC स्थापना का प्रस्ताव दे सकते हैं।

प्र. 5. क्या प्राकृतिक खेती में खरपतवार (Weeds) निकालने में अधिक मजदूरी लगती है?
उ. नहीं। मल्चिंग (आच्छादन) करने से खरपतवारों को सूर्य का प्रकाश नहीं मिलता, जिससे वे स्वतः दब जाते हैं और सड़कर खाद बन जाते हैं। इससे निराई-गुड़ाई की मजदूरी में 70% तक की बचत होती है।


14. आधिकारिक कृषि पोर्टल, संपर्क सूत्र और किसान हेल्पलाइन

  • राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती पोर्टल: naturalfarming.dac.gov.in
  • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय: agricoop.gov.in
  • जैविक खेती ई-कॉमर्स पोर्टल: jaivikkheti.in
  • किसान कॉल सेंटर (टोल-फ्री 24x7): 1800-180-1551
  • ईमेल सहायता: nmnf-support@gov.in

15. वैधानिक डिस्क्लेमर (Statutory Disclaimer)

⚠️ अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल किसान-जागरूकता, टिकाऊ कृषि मार्गदर्शन और सूचनात्मक उद्देश्यों (Public Awareness & Educational Purposes) के लिए तैयार किया गया है। JanSarkari.com का कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार या किसी राज्य कृषि विभाग से कोई प्रत्यक्ष आधिकारिक संबंध नहीं है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के दिशा-निर्देश, प्रति हेक्टेयर अनुदान राशि, क्लस्टर मानक और प्रमाणन नियम केंद्र व राज्य सरकारों के आधिकारिक ज्ञापनों के अनुसार समय-समय पर संशोधित किए जा सकते हैं। किसी भी वित्तीय निर्णय या पंजीकरण से पहले आधिकारिक पोर्टल naturalfarming.dac.gov.in तथा अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या जिला कृषि कार्यालय से जानकारी अवश्य सत्यापित करें।

आवेदन / चेक करने की प्रक्रिया

1

राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती पोर्टल (naturalfarming.dac.gov.in) पर जाएं और किसान पंजीकरण (Farmer Registration) पर क्लिक करें।

2

अपने आधार नंबर, पीएम-किसान रजिस्ट्रेशन नंबर और खतौनी/भूमि विवरण दर्ज कर अपना प्रोफाइल सत्यापित करें।

3

अपने ग्राम पंचायत में गठित 50 हेक्टेयर के स्थानीय प्राकृतिक खेती क्लस्टर (Cluster) से जुड़ें या नजदीकी बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC) चुनें।

4

प्राकृतिक खेती की 4-दिवसीय मास्टर ट्रेनिंग पूरी करें, खेत में बीजामृत/जीवामृत का प्रयोग शुरू करें और प्रत्यक्ष वित्तीय अनुदान व फ्री ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन प्राप्त करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q. राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) क्या है और इसे क्यों शुरू किया गया है?

NMNF (National Mission on Natural Farming) केंद्र सरकार का एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय मिशन है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹2,481 करोड़ के बजटीय परिव्यय के साथ मंजूरी दी है। इसका मुख्य उद्देश्य रासायनिक खादों (यूरिया, डीएपी) और जहरीले कीटनाशकों से मिट्टी और जल स्रोतों को बचाना, किसानों की खेती लागत शून्य करना, और देश के नागरिकों को रसायनमुक्त पौष्टिक खाद्यान्न उपलब्ध कराना है।

Q. प्राकृतिक खेती (Natural Farming) और जैविक खेती (Organic Farming) में क्या अंतर है?

जैविक खेती (Organic Farming) में बाहर से महंगे जैविक खाद, वर्मीकंपोस्ट या बायो-फर्टिलाइजर खरीदकर डालने पड़ते हैं, जिससे लागत बनी रहती है। जबकि प्राकृतिक खेती (Natural Farming) पूरी तरह खेत और देसी गाय पर आधारित "शून्य लागत खेती" है। इसमें किसान अपने घर पर ही देसी गाय के गोबर-गोमूत्र, गुड़, बेसन और खेत की मेड़ की मिट्टी से जीवामृत और बीजामृत तैयार करता है। इसमें बाहर से कोई भी इनपुट खरीदना नहीं पड़ता।

Q. मिशन के तहत किसानों को कितनी वित्तीय सहायता और अनुदान मिलता है?

NMNF के तहत प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को 3 वर्षों के लिए प्रति हेक्टेयर वित्तीय सहायता, देसी गाय रखने हेतु प्रोत्साहन अनुदान, खेत की तैयारी और ड्रम/उपकरणों की खरीद के लिए सहायता दी जाती है। साथ ही 10,000 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC) स्थापित करने वाले ग्रामीण उद्यमियों को ₹1 लाख तक का वित्तीय अनुदान सरकार देती है।

Q. बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC) क्या हैं और इनसे किसानों को क्या लाभ होगा?

देश भर में 10,000 बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (BRC) खोले जा रहे हैं। जिन किसानों के पास अपनी गाय नहीं है या जो व्यस्तता के कारण खुद जीवामृत नहीं बना सकते, वे इन केंद्रों से न्यूनतम लागत पर तैयार जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और दशपर्णी अर्क खरीद सकेंगे। इससे स्थानीय ग्रामीण युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।

Q. क्या प्राकृतिक खेती से उगाई गई फसलों के लिए कोई विशेष प्रमाणन (Certification) मिलता है?

हाँ! सरकार इस मिशन के तहत प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को एक आसान, डिजिटल और निःशुल्क "प्राकृतिक खेती प्रमाण पत्र (Natural Farming Certificate)" प्रदान करती है। इस प्रमाणन और क्यूआर कोड (QR Code) के आधार पर किसान अपने उत्पाद को सामान्य अनाज से 20% से 40% अधिक ऊंचे प्रीमियम दाम पर सीधे बाजारों और ऑनलाइन पोर्टल्स पर बेच सकते हैं।

Q. प्राकृतिक खेती के 4 मुख्य सिद्धांत (Four Pillars) कौन-से हैं?

पद्मश्री सुभाष पालेकर द्वारा विकसित और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त 4 प्रमुख स्तंभ हैं: 1. बीजामृत (देसी गोबर-गोमूत्र से बीजोपचार), 2. जीवामृत (करोड़ों सूक्ष्मजीवों से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना), 3. आच्छादन/मल्चिंग (मिट्टी को सूखे पत्तों या फसलों के अवशेष से ढककर नमी बचाना), और 4. वाफसा (जड़ों में हवा और नमी का सही संतुलन बनाए रखना जिससे 50% पानी की बचत होती है)।

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क्या आपको मदद चाहिए?

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