अपने गाँव की पंचायत में कितना पैसा आया, सरपंच ने कौन सा काम कहाँ करवाया, इस सबका पूरा हिसाब-किताब ऑनलाइन देखें।
यहाँ ई-ग्राम स्वराज (e-GramSwaraj) पोर्टल के बारे में विस्तृत और सम्पूर्ण जानकारी (Comprehensive Guide) दी गई है। यह एक अत्यंत विस्तृत लेख है जिसमें पंचायती राज व्यवस्था, धन आवंटन, पोर्टल का तकनीकी उपयोग, ऐप का उपयोग, और भ्रष्टाचार रोकने के तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई है।
पहले के समय में, गाँव के सरपंच (Sarpanch/Pradhan) या मुखिया और पंचायत सचिव (Panchayat Sachiv/VDO) मिलकर सरकार से आए लाखों-करोड़ों रुपये निकाल लेते थे और गाँव वालों को पता भी नहीं चलता था कि गाँव में सड़क, नाली, या स्कूल की मरम्मत के नाम पर कितना पैसा आया और कहाँ खर्च हुआ। सूचना का अधिकार (RTI) लगाने के बाद भी जानकारी मिलने में महीनों लग जाते थे।
इसी भ्रष्टाचार और लीकेज को रोकने के लिए भारत सरकार ने e-GramSwaraj का निर्माण किया। यह एक ऐसा "सिंगल विंडो" डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो पंचायत स्तर की सभी गतिविधियों को एक जगह (Planning, Budgeting, Accounting, and Monitoring) समेटता है। अब कोई भी नागरिक, चाहे वह गाँव में रहता हो या शहर में नौकरी करता हो, अपने स्मार्टफोन से देख सकता है कि उसके गाँव में क्या विकास कार्य स्वीकृत हुए हैं और ठेकेदार (Vendor) को कितना पेमेंट किया गया है।
भारत गांवों का देश है। महात्मा गांधी ने हमेशा "ग्राम स्वराज" (स्व-शासन) की वकालत की थी। उनका मानना था कि असली आज़ादी और विकास तभी संभव है जब गाँव की सत्ता गाँव के लोगों के हाथ में हो, न कि दिल्ली या राज्य की राजधानी में बैठे अधिकारियों के हाथ में।
भारत के संविधान के 73वें संशोधन (73rd Constitutional Amendment Act, 1992) ने पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) को संवैधानिक दर्ज़ा दिया। इसके तहत पंचायतों को 29 विषयों (विषय जैसे कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल आदि) पर काम करने का अधिकार और पैसा दिया गया।
भ्रष्टाचार की समस्या: जैसे-जैसे पंचायतों को सीधे केंद्र सरकार (विशेषकर 14वें और 15वें वित्त आयोग) से हज़ारों करोड़ रुपये मिलने लगे, वैसे-वैसे भ्रष्टाचार की शिकायतें भी बढ़ने लगीं। कागज़ों पर कुएं खुद जाते थे, सड़कें बन जाती थीं, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था। ऑडिट सिस्टम बहुत कमज़ोर था। सीए (CA) या सरकारी ऑडिटर फाइलों पर साइन कर देते थे।
डिजिटल समाधान (e-Panchayat Mission Mode Project): सरकार ने e-Panchayat MMP (Mission Mode Project) शुरू किया। शुरुआत में अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग सॉफ़्टवेयर थे:
इन सभी को एक साथ संभालना पंचायत सचिवों के लिए बहुत मुश्किल हो गया था। इसलिए, 2020 में भारत सरकार ने इन सभी सॉफ्टवेयरों को मिलाकर एक सिंगल, पावरफुल पोर्टल बनाया—e-GramSwaraj। यह पोर्टल पंचायत से जुड़ी हर छोटी-बड़ी गतिविधि को एक प्लेटफॉर्म पर ले आया।
इस विशाल पोर्टल को समझने के लिए इसके 4 मुख्य भागों (Modules) को समझना बहुत ज़रूरी है:
| स्तंभ (Module) | विस्तृत विवरण (Detailed Explanation) |
|---|---|
| 1. Planning (योजना निर्माण - GPDP) | इसे Gram Panchayat Development Plan (GPDP) - सबकी योजना सबका विकास कहा जाता है। हर साल 2 अक्टूबर से लेकर 31 दिसंबर के बीच ग्राम सभा की बैठक होती है। इस बैठक में गाँव के लोग तय करते हैं कि अगले वित्तीय वर्ष (Financial Year) में गाँव में क्या-क्या काम होंगे (जैसे- 20 हैंडपंप लगेंगे, 3 किलोमीटर सड़क बनेगी, आंगनवाड़ी की मरम्मत होगी)। सरपंच और सचिव इन सभी प्रस्तावों (Proposals) को e-GramSwaraj पोर्टल के प्लानिंग मॉड्यूल पर अपलोड करते हैं। ब्लॉक और ज़िला स्तर से अप्रूवल मिलने के बाद यह 'Approved Action Plan' बन जाता है। |
| 2. Accounting (लेखा-जोखा एवं बजट) | यह मॉड्यूल पंचायत का "डिजिटल बहीखाता" है। जैसे ही केंद्र (15th Finance Commission) या राज्य सरकार (State Finance Commission) पंचायत के बैंक खाते में पैसा (Funds) भेजती है, वह यहाँ 'Receipt' (प्राप्ति) के रूप में दिखाई देने लगता है। पंचायत सचिव (Sachiv) जो भी बिल पास करता है, वाउचर (Voucher) बनाता है, और जो खर्च करता है, उसकी पूरी जानकारी यहाँ 'Expenditure' (खर्च) के रूप में दर्ज़ होती है। इसके तहत डे-बुक (Day Book) और मंथ-बुक (Month Book) क्लोजिंग अनिवार्य है। |
| 3. PFMS Integration (ऑनलाइन पेमेंट) | यह e-GramSwaraj की सबसे बड़ी सफलता है। अब सरपंच और सचिव कैश (Cash) या चेक (Cheque) से पेमेंट नहीं कर सकते (कुछ बहुत छोटे अपवादों को छोड़कर)। उन्हें हर ठेकेदार (Contractor), वेंडर, या मजदूर को पैसा PFMS (Public Financial Management System) के ज़रिए सीधे उनके बैंक खाते (Direct Benefit Transfer - DBT) में भेजना होता है। इसके लिए सरपंच और सचिव के डिजिटल सिग्नेचर (DSC - Digital Signature Certificate) का इस्तेमाल होता है (Maker-Checker Concept)। इससे फर्जी बिलों पर रोक लगी है। |
| 4. Monitoring (mActionSoft - Geo-tagging) | यह सबसे क्रांतिकारी कदम है। सरपंच को किसी भी प्रोजेक्ट (जैसे नाली या सीसी रोड) की तीन चरणों (Stages) में फोटो खींचकर अपलोड करनी होती है—काम शुरू होने से पहले (Before), काम के बीच में (During), और काम पूरा होने के बाद (After)। इस फोटो में GPS की लोकेशन (Latitude/Longitude) होती है, जिसे mActionSoft ऐप के ज़रिए किया जाता है। इससे एक ही काम को अलग-अलग जगह दिखाकर दो बार बिल पास करवाने वाला भ्रष्टाचार ख़त्म हुआ है। |
भारत के किसी भी नागरिक को अपने गाँव की जानकारी देखने के लिए किसी लॉगिन आईडी या पासवर्ड की आवश्यकता नहीं है। यह जानकारी 'पब्लिक डोमेन' (Public Domain) में है। आप इसे दो तरीकों से देख सकते हैं: वेबसाइट के माध्यम से या मोबाइल ऐप के माध्यम से।
अगर आप विस्तृत जानकारी, PDF रिपोर्ट, और पूरा फंड एनालिसिस देखना चाहते हैं, तो कंप्यूटर या मोबाइल के ब्राउज़र में वेबसाइट का उपयोग करना सबसे अच्छा है।
यह देखने के लिए कि इस साल गाँव में कौन-कौन से काम पास हुए हैं:
यह देखने के लिए कि पास हुए कामों में से किस पर कितना पैसा खर्च किया जा चुका है (वेंडर को पेमेंट हो गया है):
अगर आप जल्दी से और चलते-फिरते अपने गाँव की जानकारी देखना चाहते हैं, तो भारत सरकार के National Informatics Centre (NIC) द्वारा बनाए गए आधिकारिक मोबाइल ऐप का उपयोग करें।
कई लोगों को लगता है कि सरपंच अपनी जेब से या किसी विधायक (MLA) के फंड से गाँव में काम कराता है, लेकिन ऐसा नहीं है। भारत के संविधान और वित्त आयोग के नियमों के अनुसार ग्राम पंचायतों को हर साल सीधे उनके बैंक खातों में पैसा भेजा जाता है। e-GramSwaraj इन सभी फंड्स का ट्रैक रखता है:
केंद्र सरकार (Central Government - Finance Commission):
राज्य सरकार (State Government - State Finance Commission):
अन्य केंद्रीय और राज्य योजनाएँ:
e-GramSwaraj पोर्टल इन सभी अलग-अलग योजनाओं के खातों (Bank Accounts/Scheme Codes) को एक जगह इंटीग्रेट करता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि एक योजना का पैसा दूसरी योजना में गलत तरीके से इस्तेमाल न हो (No Diversion of Funds)।
e-GramSwaraj को सुरक्षित और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाने के लिए इसमें बैंकिंग जैसी दो-स्तरीय सुरक्षा (Two-tier security) दी गई है। कोई भी एक व्यक्ति अपनी मर्जी से पैसा नहीं निकाल सकता।
इस प्रक्रिया ने चेक (Cheque) बुक से होने वाले फर्जी भुगतानों पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
e-GramSwaraj का एक बहुत महत्वपूर्ण सहयोगी पोर्टल है AuditOnline (auditonline.gov.in)।
भले ही e-GramSwaraj ने पेमेंट ऑनलाइन कर दिया, लेकिन क्या वह पेमेंट सही नियमों (Tender rules, GST bills) के तहत हुआ है? इसकी जांच के लिए 'AuditOnline' लाया गया है।
कानून और पोर्टल सरकार ने बना दिए हैं, लेकिन ज़मीन पर भ्रष्टाचार तभी रुकेगा जब गाँव का युवा और आम नागरिक इसका इस्तेमाल करेगा। आप इस तरह एक 'सिटीजन ऑडिटर' (Citizen Auditor) बन सकते हैं:
मान लीजिए आप e-GramSwaraj ऐप खोलते हैं और देखते हैं कि "वार्ड नंबर 4 में रामू के घर से लेकर मेन रोड तक सीसी (CC) रोड और पक्की नाली का निर्माण" के लिए ₹4,50,000 का खर्च (Expenditure) दिखाया गया है और ठेकेदार को पेमेंट भी हो चुका है।
आप उस जगह (वार्ड 4) पर जाते हैं और देखते हैं कि वहाँ न तो कोई सीसी रोड बनी है और न ही नाली। या फिर पुरानी ही सड़क पर थोड़ी सी मरम्मत करके छोड़ दिया गया है।
आपको क्या करना चाहिए?
इससे अधिकारियों को तुरंत एक्शन लेना पड़ेगा क्योंकि ई-ग्राम स्वराज का रिकॉर्ड एक पक्का सरकारी दस्तावेज़ (Official Government Record) है जिससे सरपंच मुकर नहीं सकता।
यहाँ e-GramSwaraj और पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े कुछ सबसे अधिक पूछे जाने वाले प्रश्न और उनके उत्तर दिए गए हैं:
प्र 1. क्या e-GramSwaraj पोर्टल पर जानकारी देखने के लिए मुझे कोई आईडी/पासवर्ड (Login ID) चाहिए?
उ. नहीं! आम नागरिकों के लिए यह पोर्टल पूरी तरह से खुला (Open Access) है। लॉगिन (Login) आईडी और पासवर्ड केवल पंचायत सचिव, सरपंच और सरकारी अधिकारियों (जैसे BDO) के लिए होता है ताकि वे डेटा (खर्च और बिल) दर्ज़ कर सकें। आप बिना लॉगिन किए सारी रिपोर्ट्स (Reports) आसानी से देख सकते हैं।
प्र 2. मेरे गाँव का डेटा (खर्च या काम) ऐप में दिखाई नहीं दे रहा है, ऐसा क्यों?
उ. इसके कुछ मुख्य कारण हो सकते हैं:
प्र 3. क्या मैं e-GramSwaraj ऐप से सीधे पंचायत की शिकायत (Complaint) कर सकता हूँ?
उ. नहीं, e-GramSwaraj ऐप और वेबसाइट मुख्य रूप से 'सूचना' (Information) प्रदान करने के लिए हैं। यह शिकायत दर्ज़ करने का प्लेटफ़ॉर्म नहीं है। अगर आपको काम में गड़बड़ी या भ्रष्टाचार मिलता है, तो आपको भारत सरकार के जन-शिकायत पोर्टल CPGRAMS (pgportal.gov.in) पर, या अपने राज्य की 'मुख्यमंत्री हेल्पलाइन' (CM Helpline), या ज़िला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) के पास सबूतों (स्क्रीनशॉट) के साथ शिकायत दर्ज़ करनी होगी।
प्र 4. पंचायत सचिव (Panchayat Sachiv/VDO) और सरपंच के काम में क्या फर्क है?
उ. सरपंच (Pradhan): गाँव का चुना हुआ राजनीतिक प्रतिनिधि (Elected Representative) होता है। वह ग्राम सभा की अध्यक्षता करता है और तय करता है कि गाँव में क्या काम होगा (Checker)।
पंचायत सचिव (VDO/PDO): यह एक सरकारी कर्मचारी (Government Official) होता है। पंचायत के बैंक खाते का संचालन, बिल वाउचर बनाना, e-GramSwaraj पोर्टल पर डेटा फीड करना, और सरकारी नियमों (Tender, GST) का पालन करवाना सचिव की ज़िम्मेदारी है (Maker)। कोई भी पैसा तब तक नहीं निकल सकता जब तक दोनों (सरपंच और सचिव) के डिजिटल हस्ताक्षर (DSC) ऑनलाइन न लग जाएं। दोनों की बराबर की ज़िम्मेदारी होती है।
प्र 5. 'Geo-tagging' (जियो-टैगिंग) क्या होती है और यह क्यों ज़रूरी है?
उ. जियो-टैगिंग का मतलब है किसी काम (जैसे सड़क निर्माण, शौचालय निर्माण) की ऐसी फोटो खींचना जिसमें सॅटेलाइट (Satellite) के ज़रिए उस जगह के सटीक अक्षांश-देशांतर (Latitude/Longitude Coordinates) और समय (Time Stamp) हमेशा के लिए दर्ज़ हो जाए।
e-GramSwaraj के तहत इसे 'mActionSoft' ऐप के ज़रिए किया जाता है। इससे यह फायदा हुआ है कि कोई भी भ्रष्ट सरपंच एक ही जगह बनी सड़क की फोटो दिखाकर, उसे गाँव के अलग-अलग वार्डों में बनी सड़क बताकर, दो बार बिल पास नहीं करवा सकता।
प्र 6. क्या मैं पंचायत के पुराने सालों (Old Records) का हिसाब भी देख सकता हूँ?
उ. हाँ! e-GramSwaraj पोर्टल पर जब से यह शुरू हुआ है (वित्तीय वर्ष 2020-21, 2021-22, 2022-23) से लेकर वर्तमान वित्तीय वर्ष तक का पूरा रिकॉर्ड (Historical Data) हमेशा उपलब्ध रहता है। आप 'Financial Year' बदलकर पुरानी रिपोर्ट्स डाउनलोड कर सकते हैं।
प्र 7. ग्राम सभा (Gram Sabha) और ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) में क्या बुनियादी फर्क है?
उ. ग्राम सभा: गाँव के वे सभी मतदाता (Citizens) जिनका नाम वोटर लिस्ट (Electoral Roll) में है, वे ग्राम सभा के सदस्य होते हैं। ग्राम सभा संसद (Parliament) की तरह है जो निर्णय लेती है कि गाँव में क्या काम होगा।
ग्राम पंचायत: ग्राम सभा द्वारा चुने गए लोग (सरपंच/प्रधान और वार्ड मेंबर/पंच) ग्राम पंचायत (कार्यपालिका) बनाते हैं। ये लोग ग्राम सभा द्वारा लिए गए निर्णयों को ज़मीन पर लागू (Execute) करते हैं। e-GramSwaraj का 'Action Plan' (GPDP) अपलोड होने से पहले ग्राम सभा (खुली बैठक) में पास होना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
प्र 8. मुझे e-GramSwaraj पोर्टल चलाने में तकनीकी दिक्कत आ रही है, वेबसाइट बहुत धीमी है, मैं किससे संपर्क करूँ?
उ. पोर्टल का प्रबंधन NIC (National Informatics Centre) करता है। महीने के अंत में (विशेषकर 31 मार्च के आसपास) सर्वर पर लोड बहुत ज़्यादा होता है इसलिए वेबसाइट धीमी हो सकती है। अगर कोई बड़ी तकनीकी दिक्कत है, तो पोर्टल पर एक 'Contact Us' पेज है जहाँ MoPR का हेल्पलाइन ईमेल (egramswaraj@gov.in) दिया गया है। पंचायत स्तर की दिक्कत के लिए ब्लॉक कार्यालय (BDO Office) जाना चाहिए।
प्र 9. अगर सरपंच (Pradhan) कहता है कि सरकार ने पैसा ही नहीं भेजा (फंड नहीं है), तो मैं सच्चाई कैसे पता करूँ?
उ. यह एक बहुत आम बहाना है। सच्चाई जानने के लिए आपको सिर्फ e-GramSwaraj पोर्टल के 'Accounting' -> 'All India Report' -> 'Receipts' सेक्शन में जाना है। वहाँ वित्तीय वर्ष चुनकर अपनी पंचायत का नाम खोजें। पोर्टल आपको 1 रुपये तक का सटीक हिसाब दिखा देगा कि 15वें वित्त आयोग या राज्य वित्त आयोग से इस साल पंचायत के खाते में कितना पैसा क्रेडिट (Credit) हुआ है। आप इसका प्रिंटआउट लेकर सरपंच से सवाल कर सकते हैं।
e-GramSwaraj (ई-ग्राम स्वराज) महात्मा गांधी के "ग्राम स्वराज" (आत्मनिर्भर और स्व-शासित गाँव) के सपने को 21वीं सदी के डिजिटल इंडिया (Digital India) और ई-गवर्नेंस (e-Governance) से जोड़ने की एक सबसे बेहतरीन और सफल पहल है। यह शायद दुनिया का सबसे बड़ा ग्रामीण प्रशासन का आईटी प्रोजेक्ट है, जो 2.5 लाख से ज़्यादा पंचायतों का रियल-टाइम डेटा संभाल रहा है।
लोकतंत्र (Democracy) तभी सही मायने में सफल होता है जब ज़मीनी स्तर (Grassroots level) पर आम जनता जागरूक हो। यह पोर्टल और टेक्नोलॉजी सरकार ने बना दी है, लेकिन इसका सही और पूरा फायदा तभी होगा जब गाँव का हर युवा, छात्र, किसान और जागरूक नागरिक अपने मोबाइल में यह ऐप डाउनलोड करेगा और अपनी पंचायत के कामों पर नज़र रखेगा (Watchdog)।
अपने पंचायत सचिव और सरपंच से सवाल पूछिए, उनकी जवाबदेही (Accountability) तय कीजिए, क्योंकि पंचायत के खाते में आया वह पैसा किसी राजनेता या अधिकारी का नहीं, बल्कि आप ही का गाढ़ी कमाई का टैक्स (Tax Money) का पैसा है, जो केवल और केवल आपके गाँव के विकास (Village Development) के लिए भेजा गया है।
e-GramSwaraj पोर्टल (egramswaraj.gov.in) पर जाएं या मोबाइल ऐप डाउनलोड करें।
"Planning" या "Accounting" रिपोर्ट्स पर क्लिक करें।
अपना राज्य (State), ज़िला पंचायत, ब्लॉक और अपनी ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) चुनें।
यहाँ से आप अपनी पंचायत का अप्रूव्ड एक्शन प्लान (Approved Action Plan) और किए गए खर्च (Expenditure) की पूरी लिस्ट देख सकते हैं।
e-GramSwaraj पोर्टल जानकारी देखने के लिए है। शिकायत के लिए आप राज्य के सीएम हेल्पलाइन या CPGRAMS पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं।
बिना किसी रुकावट के सीधे सरकारी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें।
नोट: किसी भी सरकारी सेवा के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट का ही उपयोग करें।
JanSarkari.com आपको सही और सटीक जानकारी प्रदान करने का प्रयास करता है। यदि आपको ई-ग्राम स्वराज (e-GramSwaraj) से जुड़ी कोई समस्या है, तो आप संबंधित विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।